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    गोंदिया.  किसानों के खेत माल की कीमत में मामूली बढ़त हो रही है. जिससे भारी आशाओं के साथ किसान खरीफ मौसम की तैयारी में जुट गया है. फसल का नियोजन करने में कृषि बीजाई व खाद की बढ़ी कीमत से किसानों का तालमेल बढ़ा है. कम खाद लगने वाली फसल लेने पर उत्पादन सहित भाव की गारंटी नहीं है. इसी तरह अधिक खाद लगने वाली फसल लेने पर उत्पादन खर्च बढेगा. इस पेंच में किसान फंस गया है. इसका असर फसल पद्धति तथा क्षेत्र पर होने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता है.

    मौसम विभाग ने इस वर्ष समय पर बारिश होने का अनुमान व्यक्त किया है. जिससे खरीफ मौसम के लिए महीने भर का समय लग गया है. खेतों में कृषि कार्य अंतिम चरण में है. किसानों ने अब खरीफ के लिए बीजाई लेने की ओर रूख किया है. खरीफ की बुआई की पूर्व तैयारी शुरू की गई है. इसी तरह कृषि बीजाई व खाद की बढ़ी कीमत से किसानों के समक्ष कौनसी फसल लें ऐसा प्रश्न उपस्थित हो गया है. इस बढ़ती कीमतों ने किसानों का आर्थिक बजट बिगाड़ दिया है.

    किसानों की जद्दोजहद

    जिले में सामान्यत: खरीफ की बुआई जून महीने के दुसरे सप्ताह में शुरू होती है. बुआई के लिए समय पर समस्या न हो इसके लिए किसान मई महीने से बीजाई, खाद खरीदी कर रखते है. जिससे बाजार में किसानों की भीड़ दिखाई दे रही है. किसान बुआई के लिए लगने वाले रासायनिक खाद, बीजाई की खरीदी करने के लिए भारी जद्दोजहद कर रहे है. लेकिन खाद की कीमत लगभग 15 से 17 प्रश. बढ़ने से किसानों की क्रयशक्ति कमजोर हो रही है. इसके लिए किसान संयम का परिचय दे रहे है.

    खाद समय पर उपलब्ध हो

    जिले में खाद समय पर उपलब्ध हो. खाद की बढ़ी कीमते किसानों के लिए गौण है. जिससे उनका समय और आवश्यकता के अनुसार उपलब्धता महत्वपूर्ण है. मई के अंत तक सभी खाद चिल्लर विक्रेताओं तक पहुंचना चाहिए. जिससे किसान बुआई के पूर्व खाद का उपयागे कर सके. जिले में खाद की मांग बढ़ेगी जिससे प्राथमिकता के साथ डीएपी खाद पर्याप्त संख्या में होना जरूरी है.