Ambazari

    नागपुर. अंबाझरी उद्यान का कल्याण करने के चक्कर में उसकी पूरी तरह दुर्दशा कर दी गई है. तत्कालीन भाजपा सरकार ने उसे पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने लिए एमटीडीसी को ट्रांसफर किया था. ऐसा लग रहा था यह एक विश्व स्तरीय उद्यान बनेगा लेकिन विभाग ने जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया. उसके बाद फिर उद्यान की जिम्मेदारी मनपा के पास वापस आ गई. आज हालत यह कि विकास की जगह यहां दुर्दशा ही दुर्दशा का नजारा आता है. कभी यह उद्यान विदर्भ की शान हुआ करता था. अंबाझरी लेक में बोटिंग और किड जोन में वीकेंड ही नहीं बल्कि सप्ताहभर रोजाना शाम को भारी भीड़ उमड़ा करती थी. आज हालत यह है कि मॉर्निंग वॉक के लिए जाने वालों को भी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. उद्यान विकास के नाम पर बंद कर रखा गया है. कहीं पेड़ धराशायी हो गया है तो कहीं गंदगी का आलम है. कहीं गड्डे हो गए हैं तो कहीं वॉकिंग ट्रैक की टाइल्स उखड़ गई हैं. 

    जवाब देने वाला कोई नहीं

    इस उद्यान का कल्याण कब तक होगा बताने वाला मनपा में कोई अधिकारी नहीं हैं क्योंकि उन्हें इसकी जानकारी नहीं है. मनपा की सत्ता में बैठे कर्णधारों ने अंबाझरी ओवरफ्लो प्वाइंट पर स्वामी विवेकानंद स्मारक तो बेहद सुंदर तरीके से विकसित किया लेकिन अंबाझरी उद्यान को अपनी हालात पर आंसू बहाने के लिए छोड़ दिया है. कोई नियोजन कोई प्लानिंग ही नजर नहीं आ रही है. हालत यह है कि बच्चों की फिसलपट्टी टूटकर कबाड़ हो गई है. झूले धराशायी हो गए हैं. जंग लगते कबाड़ यहां किड जोन में नजर आते हैं. कभी यहां टायट्रेन भी चलती थी. शहर के इस शानदार उद्यान की जो दुर्गति स्थानीय प्रशासन ने की है उसे देख यहां नियमित आने वाले नागरिकों को दुख होता है और साथ ही रोष भी.

    लाइब्रेरी को बना दिया किचन

    जनसमस्या निवारण संघर्ष समिति के कार्याध्यक्ष एन.एल. सावरकर ने बताया कि उद्यान में लाइब्रेरी थी. आज वह बंद कर दी गई है और यहां काम करने वाले इसे किचन बना कर रखे हुए हैं. यहां भोजन पकाने का काम हो रहा है. सुरक्षा के लिए पर्याप्त व्यवस्था नहीं हैं. सुंदरता का कबाड़ा हो रहा है. विकास के सपने दिखाकर लोगों को बेवकूफ बनाने का काम मनपा के अधिकारियों और पदाधिकारियों ने किया है. यहां भी मॉर्निंग वॉक के लिए समीप की बस्तियों में रहने वाले नागरिक आते हैं. उद्यान में शौचालय-मूत्रालय बंद है. कचरे से भरे हैं बच्चों के खेलने के सारे शीशा-झूले आदि टूट-फूट गए हैं. कोई बताने वाला नहीं है कि आखिर कब तक इस उद्यान का कल्याण होगा.