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    नागपुर. एंटी करप्शन ब्यूरो नागपुर में दर्ज एक मामले में कोर्ट ने उमरेड नगरपरिषद के कनिष्ठ अभियंता को मकान का नक्शा पास कराने के लिए 2,000 रुपये की रिश्वत मांगने को दोषी पाया. जिला न्यायाधीश लाडेकर द्वारा उसे 2 विभिन्न धाराओं में 1-1 वर्ष का सश्रम कारावास की सुजा सुनाई.

    दोषी कनिष्ठ अभियंता का नाम रमेश शंभरकर है. रमेश अभी लकवाग्रस्त है. मामला 12 जनवरी 2012 का है. सिविल कानट्रैक्टर जोगीठाणापेठ, उमरेड निवासी राजेन्द्र तुलसीराम मेश्राम की शिकायत पर एसीबी, नागपुर ने मामला दर्ज कर शंभरकर को रिश्वत लेते रंगेहाथ गिरफ्तार किया था.

    प्राप्त जानकारी के अनुसार मेश्राम ने 18 दिसंबर 2011 को उमरेड निवासी शैलेश खानोरकर से उनका घर बनाने के लिए 5.70 लाख रुपये में करार किया था. चूंकि खानोरकर नौकरी के सिलसिले में अमरावती में रहते थे. ऐसे में उन्होंने शपथ पत्र के माध्यम से घर का नक्शा पास कराने की जिम्मेदारी मेश्राम को दे दी थी. मेश्राम ने नक्शा पास कराने के लिए उमरेड नगरपरिषद में नियमानुसार 125 रुपये का शुल्क भी भरा जिसकी रसीद भी उसे दी गई.

    3 दिन में नक्शा पास करने का झांसा

    नक्शा पास कराने के लिए मेश्राम कनिष्ठ अभियंता शंभरकर से मिले. शंभरकर ने उन्हें 2 से 3 दिन में घर का नक्शा पास कराने का झांसा दिया लेकिन इसके लिए 2,000 रुपये की रिश्वत मांगी. मेश्राम ने एसीबी में इसकी शिकायत की. एसीबी ने 10 जनवरी 2012 को जाल बिछाकर शंभरकर को 2,000 रुपये की रिश्वत लेते रंगेहाथ गिरफ्तार कर लिया. एसीबी द्वारा पेश किये गये सबूतों और बयानों के आधार पर कोर्ट ने शंभरकर को रिश्वतखोरी का दोषी करार दिया. सजा के तौर पर सेक्शन 7 और सेक्शन 13 के तहत 1-1 वर्ष का सश्रम कारावास सुनाया.