Old Bhandara Road

    नागपुर. गडकरी का गढ़ कहे जाने वाली इस सिटी में जितने करोड़ों के विकास कार्य हुए हैं उतने सचमुच पिछले कई दशकों में भी एक साथ नहीं हुए हैं. यहां की पब्लिक भी खुश है. वर्षों तक खराब नहीं होने वाली सीमेन्ट सड़कें बन चुकी हैं, बन रही हैं. कई ओवरब्रिज बनकर शुरू भी हो चुके हैं जिसके चलते सड़कों पर ट्राफिक का दबाव बंटा है. यातायात कुछ सुचारू भी हुआ है. जहां शहरवासी सोच भी नहीं सकते थे, सिटी में उन जगहों पर नई सड़कें बनाकर मुख्य सड़कों से जोड़ने का भी कार्य किया गया है, लेकिन पुराना भंडारा रोड के सैकड़ों नागरिकों और व्यापारियों के दिमाग में सवाल उठने लगे हैं कि आखिर नेताओं और यहां अधिकारियों को पुराना भंडारा रोड से क्या दुश्मनी है जो उसे वर्षों से अटका कर रखा है. अब तो इस रोड को मुआवजा के पौने चार सौ करोड़ रुपयों की जरूरत बताते हुए लंबे से लटका दिया गया है.

    नागरिकों को संदेह हो रहा है कि कहीं इस डीपी रोड के साथ परमानेंट ‘खेला’ तो नहीं किय जा रहा. डीपी रोड में तो इसे 60 वर्ष पहले ही शामिल कर लिया गया था लेकिन 2017 जुलाई में एक जनहित याचिका की सुनवाई में हाईकोर्ट ने फटकार लगाते हुए मनपा को इस रोड के चौड़ाई करण करने का आदेश दिया था. कुछ हल तब हुई और आशा जगी थी इस रोड का कल्याण होगा लेकिन फिर अलग-अलग कारणों से इसे लटका दिया गया है. अब जब सबकुछ क्लीयर है तो इसे प्रभावितों की मुआवजा राशि नहीं होने का हवाला देकर रोका गया है. 

    महज ढाई किमी है लंबाई

    सिटी में तो ढाई किमी से अधिक लंबे ओवरब्रिज बनकर तैयार हो गए हैं लेकिन मेयो चौक से सुनील होटल तक का 2500 मीटर का पुराना भंडारा रोड का सीमेन्टीकरण नहीं किया जा सका है. इस डीपी रोड को 60 फीट चौड़ा करना है. जुलाई 2017 में हाईकोर्ट के आदेश के बाद यंत्रणा सक्रिय हुई थी. मनपा व नगर रचना विभाग द्वारा रोड का मापजोख कर चौड़ाईकरण में कितनी प्रापर्टी का कितना हिस्सा जाने वाला है उसका पूरा प्रारूप तैयार कर लिया गया. 41 निजी प्रापर्टीधारकों को तो मुआवजा का भुगतान कर कब्जा पत्र भी मनपा ने ले लिया है. इसके अलावा बाधित प्रापर्टी में 11 मनपा, 92 राज्य सरकार और 14 एनआईटी की मालिकी की है. इस तरह कुल 117 तो सरकार की ही प्रापर्टी है जिसे खाली करने की किसी तरह की कवायद की जरूरत नहीं है. बावजूद इसके बाधित प्रापर्टियों को तोड़ने की कार्रवाई शुरू नहीं की गई है. इससे बार-बार यह भी संदेह नागरिकों को हो रहा है कि इस रोड को किसी न किसी बहाने से अटकाने का बड़ा खेल चल रहा है. 

    केलीबाग में तत्काल एक्शन

    नागरिकों को आश्चर्य है कि केलीबाग डीपी रोड के लिए जैसे ही केन्द्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने मनपा के पदाधिकारियों और अधिकारियों को हड़काया तो तत्काल ही सब एक्शन में आ गए. कई प्रापर्टी व दूकानें तोड़ दी गईं और कुछ हिस्से में सीमेन्ट रोड का निर्माण भी शुरू कर दिया गया है. पुराना भंडारा रोड के संदर्भ में भी गडकरी ने जल्द से जल्द काम शुरू करने का कई बार निर्देश दे दिया है लेकिन मगराये हुए अधिकारी उनकी भी नहीं सुन रहे हैं. गडकरी ने तो सीआर फंड से निधि भी मंजूर कर दी है. यह रोड इतना संकरा हो गया है कि निवारी व दूकानदार परेशान हो गए हैं. ट्राफिक जाम की समस्या तो हर दिन की है. व्यापारिक क्षेत्र होने के चलते भीड़ भी अधिक रहती है. इसलिए जल्द से जल्द इस रोड के निर्माण की जरूरत है. 

    375 करोड़ रुपये का खेला

    पुराना भंडारा रोड मनपा की जिम्मेदारी है. अब जब इसकी सारी तकनीकी अड़चनें दूर हो गई हैं तो बात बाधित प्रापर्टीधारकों को मुआवजा वितरण की राशि पर लटक गई है. केन्द्रीय मंत्री गडकरी ने तो रोड निर्माण के लिए निधि मंजूर कर दी लेकिन बाधितों को मुआवजा देने के लिए मनपा को करीब 375 करोड़ रुपये की जरूरत है. कुछ महीने पहले महापौर दयाशंकर तिवारी ने कहा था कि जब देवेन्द्र फडणवीस सीएम थे तब उन्होंने राज्य सरकार द्वारा उक्त निधि उपलब्ध कराने की बात कही थी लेकिन सरकार बदल गई. मविआ सरकार से निधि की मांग की गई है लेकिन निधि नहीं मिली. उन्होंने तब साफ तौर पर कहा था कि जब तक राज्य सरकार पौने चार सौ करोड़ रुपये नहीं देगी यह रोड नहीं बन सकेगा क्योंकि मनपा के पास इतनी आय नहीं की वह खर्च सके. वहीं दूसरी ओर पालकमंत्री नितिन राऊत ने यह कहकर मनपा को आड़ेहाथ लिया था कि उक्त विषय मनपा का है और इससे राज्य सरकार का कोई संबंध नहीं है. अपनी योजना को पूरा करने का काम मनपा है और वह अपनी असफलता को सरकार के सिर पर फोड़ने का प्रयास कर रही है.