पिंपरी में सहायक आयुक्त ने पलटा महानगरपालिका कमिश्नर का निर्णय, कार्रवाई की मांग

    पिंपरी:  देश में नौकरशाहों के लिए एक संवैधानिक दायरा बनाया गया है। अगर कोई अपने संवैधानिक दायरे को लांघता है तो अपराधी की श्रेणी में आता है। किसी भी सरकारी, गैर-सरकारी संस्थानों में मुख्य बॉस का निर्णय सर्वोपरि माना गया है। नीचे की टीम को अनुसरण करना पड़ता है। अगर अपने बॉस के निर्णय (Decision) को क्रॉस करके कोई अपना निर्णय थोंपता है तो सीधे तौर पर अपने बॉस की बुद्धिमत्ता, निर्णय को चुनौती देता है। पिंपरी-चिंचवड महानगरपालिका (Pimpri-Chinchwad Municipal Corporation) में ऐसा ही कुछ हुआ है। 

    छठ पूजा (Chhath Puja) के महापर्व पर महानगरपालिका कमिश्नर राजेश पाटिल (Municipal Commissioner Rajesh Patil) ने शहर के सभी घाटों पर सरल, शांतिपूर्ण ढंग से छठ पूजा मनाने की लिखित अनुमति देते हैं। दूसरे दिन उनके सहायक आयुक्त अण्णा बोदडे अपने ही कमिश्नर के निर्णय को पलट देते है और अपनी मनमर्जी से एक स्वतंत्र पत्र जारी करते हुए छठ पूजा पर रोक लगा देते है। छठव्रतियों में आश्चर्यजनक भ्रम की स्थिति पैदा होती है कि आखिर महानगरपालिका का कमिश्नर कौन? अण्णा बोदडे या फिर राजेश पाटिल? आखिर किसके पत्र और निर्णय को अधिकारिक तौर पर माना जाए।

    छठमाता की वेदी सूनी रही

    अण्णा बोदडे केवल अपने द्धारा हस्ताक्षरित पत्र जारी करने तक सीमित नहीं रहते। पुलिस फोर्स के साथ मोशी इंद्रायणी घाट पर दबंग वाली इंट्री करते है। छठव्रतियों को जबरन रोकते है,आयोजकों और छठव्रतियों के साथ अभद्र, अपमानित भाषा शैली का इस्तेमाल करते है। एमआईडीसी भोसरी पुलिस को सख्त निर्देश देते है कि अगर एक भी छठव्रती अंदर गया तो पुलिस की जवाबदेही होगी। नतीजा यह रहा कि कई छठव्रतियों को अपने पूजा की सामाग्री के साथ आंख में आंसू, दिल से श्राप देकर बिना पूजा किए वापस लौटना पड़ा। घाट पर उनके द्धारा स्थापित छठमाता की वेदी सूनी रही, अपने भक्तों का इंतजार करती रही।

    ताकतवरों के आगे सरेंडर

    भोसरी तलाव घाट पर इस दबंग सहायक आयुक्त की दबंगई काम नहीं आती। वहां के ताकतवरों के सामने सरेंडर नजर आए। भोसरी घाट पर विधिवत छठपूजा मनाने की अनुमति दी। एक घाट पर एक कानून दूसरे घाट पर दूसरा कानून अण्णा बोदडे की दिमाग की उपज है। बोदडे की इस तानाशाही निर्णय से महानगरपालिका कमिश्नर राजेश पाटिल बिल्कुल अंजान थे। 

    घटना की जांच कर दोषियों पर कार्रवाई होगी: कमिश्नर

    विश्व श्रीराम सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष लालबाबू गुप्ता ने इस गंभीर प्रकरण को जब कमिश्नर के सामने रखा तो वो भी दंग रह गए। उन्होंने आश्चर्य व्यक्त करते हुए कहा कि मैंने तो सभी घाटों पर छठपूजा करने की अनुमति दी थी, फिर मेरे ही निर्णय को मेरे बिना इजाजत कैसे पलटा गया? मैं इस घटनाक्रम की संपूर्ण जांच कराऊंगा। दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई करुंगा। ऐसा ठोस आश्वासन कमिश्नर ने शिष्ठमंडल को दिया। शिष्ठमंडल ने अपनी मांगों और सवालों भरा एक पत्र कमिश्नर को सौंपा।

    माफी नहीं, दोषियों पर कार्रवाई हो: लालबाबु गुप्ता

    विश्व श्रीराम सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष लालबाबु गुप्ता ने बताया कि हिंदूओं का सबसे बड़ा पर्व छठपूजा पर रोक लगाना आस्था के साथ खिलवाड़ है। छठव्रति माता-बहनों की भावनाओं को आहत किया गया। अभद्र व्यवहार किया गया। ऐसी रोक केवल मोशी इंद्रायणी घाट पर नहीं, बल्कि मोरया गोसावी चिंचवड, गणेश तलाब समेत अन्य घाटों पर पूजा करने से रोका गया। हालांकि महानगरपालिका कमिश्नर राजेश पाटिल और पुलिस कमिश्नर कृष्ण प्रकाश ने छठव्रति माताओं,बहनों से माफी मांग ली है। मगर केवल माफी से काम नहीं चलेगा। दोनों विभाग प्रमुख अपने अधिकारियों और कर्मचारियों पर कार्रवाई करें ऐसी हमारी मांग है।