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    पुणे. केंद्र की मोदी सरकार (Modi Government) जिस गति से सरकारी उद्यमों और सार्वजनिक यातायात सेवाओं का निजीकरण (Privatization) कर रही है, वह पूरी तरह लोकतंत्र विरोधी कदम है। पिछले 70 वर्षों में स्थापित विशालकाय प्रोजेक्ट चंद मुट्ठीभर पूंजीपतियों के हाथों में सौंपने से देश को गंभीर तौर पर नुकसान (Loss) होगा। स्वतंत्रता के बाद देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू (First Prime Minister Pandit Jawaharlal Nehru)की पंचवार्षिक नीतियों के चलते ही देश का विकास (Development) हुआ है।  यह बात राज्य के जलसंपदा मंत्री जयंत पाटिल (Minister Jayant Patil) ने व्यक्त किया।

    राजीव गांधी स्मारक समिति के अध्यक्ष गोपाल तिवारी की ओर से ‘मोदी सरकार का लोकतंत्र या निजीतंत्र’ विषय पर वेबिनार का आयोजन किया गया। इस वेबिनार में जयंत पाटिल बोल रहे थे। इस समय शिवसेना के सांसद अरविंद सावंत, पत्रकार अनंत बागाइतकर भी उपस्थित थे। सहभागी नेताओं और विशेषज्ञों की मानें तो जनता की सेवा करना और उन्हें सुविधा दिलाना सरकार का पहला कर्तव्य होता है। लेकिन निजीकरण की नीति के नाम पर देश की महत्वपूर्ण यातायात, कम्युनिकेशन समेत सभी तरह के उद्योगों और सेवाओं का निजीकरण देश के लिए घातक सिद्ध होगा। निजीकरण से संविधान का ‘सामाजिक न्याय’ का तत्व आहत होता है।

    पूंजीपतियों के हितों की रक्षा कर रही सरकार

    गोपाल तिवारी ने कहा कि जनता के टैक्स से लोगों को सार्वजनिक सुविधा देने की बजाय सरकार निजीकरण के माध्यम से केवल पूंजीपतियों के हितों की रक्षा कर रहा है। इसका जनता पर काफी बुरा असर होगा। इसकी जानकारी लोगों तक पहुंचाने के लिए ही हमारा यह प्रयास है। वरिष्ठ पत्रकार अनंत बागाईतकर और सांसद अरविंद सांवत ने भी मोदी सरकार की नीतियों को गलत बताते हुए उन पर तंज कसा। सूर्यकांत मारणे ने उपस्थित सभी के आभार प्रकट किया।