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    पुणे. पिछले कई वर्षों से अधर में लटके पुणे महानगरपालिका (Pune Municipal Corporation) के अधिकारी और कर्मचारियों को आखिरकार 7वें वेतन आयोग (7th Pay Commission) लागू करने को राज्य सरकार के शहरी विकास विभाग ने हरी झंडी दिखा दी है। इस फैसले से महानगरपालिका के करीब 15 हजार कर्मचारी लाभान्वित होंगें। हालांकि इस फैसले के बाद महानगरपालिका की तिजोरी पर करीब 17 करोड़ रुपए का बोझ बढ़ जाएगा। राज्य सरकार अपने कर्मचारियों के लिए सातवें वेतन आयोग को पहले ही लागू कर चुकी है। हालांकि पुणे महानगरपालिका के कर्मचारियों से संबंधित फैसला लंबित था। इस बीच, मजदूर संगठन के पदाधिकारियों ने आयोग को लागू करने की मांग को लेकर उपमुख्यमंत्री अजीत पवार (Deputy Chief Minister Ajit Pawar) से मुलाकात की थी। उन्होंने आश्वासन दिया था कि जल्द ही फैसला लिया जाएगा। 

    इसी के तहत उपमुख्यमंत्री अजीत पवार और शहरी विकास मंत्री एकनाथ शिंदे ने एक ऑनलाइन बैठक में उक्त फैसला किया। इस मौके पर विधान परिषद की उपसभापति डॉ. नीलम गोर्हे, शहरी विकास सचिव महेश पाठक, महापौर मुरलीधर मोहोल, पुणे महानगरपालिका कमिश्नर विक्रम कुमार, शिवसेना गुट नेता पृथ्वीराज सुतार और महानगरपालिका ट्रेड यूनियन के प्रतिनिधि उपस्थित थे।

    बकाया का भुगतान पांच किस्तों में किया जाएगा

    इस बैठक के बाद जानकारी देते हुए महानगरपालिका कमिश्नर ने कहा कि महानगरपालिका के अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए 7वां वेतन आयोग लागू करने का निर्णय लिया गया। पिछले बकाया का भुगतान पांच किस्तों में किया जाएगा। इस फैसले से महानगरपालिका के 15 हजार 73 अधिकारी और कर्मचारी लाभान्वित होंगे, उन्हें औसतन 23 फीसदी वेतनवृद्धि मिलेगी। उनके अतिदेय वेतन के लिए 525 करोड़ रुपए की आवश्यकता होगी। इस फैसले से 2016 के बाद सेवानिवृत्त हुए कर्मचारियों को भी लाभ मिलेगा। वेतन की फर्क राशि का भुगतान चरणों में किया जाएगा। सेवानिवृत्त और नियमित कर्मचारियों के वेतन से महानगरपालिका की तिजोरी पर 17 करोड़ रुपए का बोझ बढे़गा। 

     वेतन पर 1,800 करोड़ से 1,900 करोड़ रुपए खर्च किए जा रहे है 

    फिलहाल मनपाकर्मियों के वेतन पर 1,800 करोड़ से 1,900 करोड़ रुपए खर्च किए जा रहे है। सातवें वेतन आयोग की वजह से यह खर्च बढ़कर 2,200 करोड़ रुपए हो जाएगा। इस बारे में पुणे के महापौर मुरलीधर मोहोल ने कहा कि यह कर्मचारियों के लिए बहुत महत्वपूर्ण और संतोषजनक है। हम सातवें वेतन आयोग के लिए प्रतिबद्ध हैं और यह हमारे निरंतर प्रयासों का परिणाम है। मेरे साथ विपक्ष के नेता देवेंद्र फडणवीस ने राज्य सरकार को पत्र लिखकर सातवें वेतन आयोग की सिफारिशें लागू करने की मांग की थी। शहरी विकास मंत्री एकनाथ शिंदे द्वारा अंतिम स्वीकृति दिए जाने से उनका बहुत-बहुत धन्यवाद।