रबी सत्र में अनुदानित चना बिज पर नियम और शर्तों का ग्रहण

    यवतमाल.किसान एक ओर खरीफ फसल सत्र निबटते ही रबी फसल लेने की तैयारी में जुटे है, रबी सत्र में गेंहु, और चने की फसल अधिक पैमाने पर ली जाती है. इस वर्ष भी जिले में चना की फसल की अधिक बुआई होंगी, कृषि विभाग ने इसके लिए किसानों को सबसिडी पर गावनानी चना बिज देने का नियोजन किया है, लेकिन इसमें कडे नियम और शर्ते होने से चना उत्पादक किसानों को आसानी से चना बीज मिलने की संभावना कम दिखाई दे रही है.

    चना बीज के लिए जीन किसानों ने ऑनलाईन बुकींग की है, उन्हे ही यह बिज कृषि विभाग देंगा, जिससे अनेक अल्पभुधारक किसानों को इससे वंचित रहने की नौबत आ सकती है. इसमें कडी शर्ते यह रखी गयी है की, जीन किसानों के सात बारह पर सिंचाई की सुविधा दर्ज है, उन्हे ही यह चना बिज मिलेंगे, एैसा फतवा महागांव कृषि विभाग ने जारी किया है.

    इसके अलावा जिले के अधिकांश तहसीलों में भी कृषि विभाग ने एैसी शर्ते और नियम रखे है, जिससे रबी फसल लेनेवाले  किसानों में परेशानी निर्माण हो चुकी है.पहले ही अतिवृष्टी से बर्बाद हुए किसानों को सरकार की मदद नही मिल पाई है, एैसे में अगली फसल की तैयारी में जुटे किसानों को मदद करने की बजाय नियम और शर्ते लगाकर उन्हे परेशान किया जा रहा है.केवल सिंचाई के खेत को ही बीज मिलेंगे,यह शर्ते कृषि विभाग ने क्यों रखी है, इस बारे में किसानों को कोई जानकारी नही दी जा रही है.

    उल्लेखनिय है की चना फसल लेने किसानों को बीज कृषि विभाग से पर्याप्त पैमाने पर नही मिलेंगे, क्योंकी प्रति हेक्टेयर के लिए किसान को 80 किलो चना बीज लगता है, और कृषि विभाग ने हर किसान को प्रति हेक्टेयर 30 कीलो चना बीज देने का नियम लागु किया है.इसके अलावा किसानों को जीन प्रजाती के चना बीज चाहीए, वह कृषि विभाग से नही मिल पा रहे है.

    एैसी  जानकारी कुछ किसानों ने दी.कुल मिलाकर पहले अतिवृष्टी से बर्बाद किसानों को अब कृषि विभाग की लालफिताशाही और अडियल रवैये से दो चार होना पड रहा है, जिससे रबी फसल लेनेवाले किसानों में कृषि विभाग के खिलाफ नाराजी जतायी जा रही है.