पनवेल में आरोग्य अधिकारियों के पद खाली, राज्यपाल ने दिया भरने का निर्देश

नवी मुंबई. पनवेल महानगर पालिका कोविड 19 से लड़ाई में कितनी सक्षम है इसका अंदाजा यहां के आरोग्य अधिकारियों की कमी से आसानी से लगाया जा सकता है. तकरीबन 10 लाख की आबादी वाले पनवेल मनपा के पास मात्र 4 महिला डॉक्टर हैं.जबकि आरोग्य विभाग में 2 उच्चाधिकारियों के पद बीते 4 सालों से खाली पड़े हैं. जाहिर है मेडिकल आफिसर की कमी से कोरोना के खिलाफ लड़ाई कमजोर पड़ रही है. सच ये है कि 4 साल पहले ही अस्तित्व में आयी पनवेल महानगर पालिका में मात्र 4 महीनों के लिए आरोग्य अधिकारी की नियुक्ति की गयी थी जिसे स्वास्थ्य मंत्री ने अपना ओएसडी बना दिया तब से यहां इस पद पर स्थाई मेडिकल अफसर की मांग चल रही है.

स्वतंत्र मनपा को स्वतंत्र मेडिकल अफसर क्यों नहीं

बताना जरूरी है कि पनवेल मनपा की स्थापना के 3 साल बाद अक्टूबर 2019 में पहली बार डॉ.सचिन जाधव को चीफ मेडिकल आफिसर नियुक्त किया गया लेकिन 4 महीने बाद फरवरी 2020 में उन्हें स्वास्थ्य मंत्री राजेश टोपे के यहां ओएसडी बना दिया गया. 25 मार्च कोरोना प्रकोप बढ़ने के बाद उरण के स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. राजेन्द्र इटेकर को प्रभारी बनाया गया लेकिन उरण में बढ़ते कोरोना को देखते हुए उन्हें 12 मई को वापस बुला लिया गया. जून 2020 में जिला परिषद के पनवेल ग्रामीण के वैद्यकीय अधिकारी डॉ. सुनिल नखाते को प्रभारी बनाया गया लेकिन जब वे कोविड संक्रमित हो गए तबसे पनवेल मनपा का आरोग्य विभाग बिना उच्चाधिकारी वाला हो गया.

आरोग्य अधिकारी के जरिए बेहतर होंगी सेवाएं

इस संदर्भ में जुलाई 2020 में पनवेल संघर्ष समिति के अध्यक्ष कांतिलाल कड़ू द्वारा शिकायत देकर पनवेल में मुख्य आरोग्य अधिकारी और उप अधिकारी की तत्काल नियुक्ति की मांग की गयी थी. मुख्यमंत्री, स्वास्थ्य मंत्री और राज्यपाल से की गयी मांग का असर अब दिखने लगा है. फिलहाल 10 महीनों के बाद पनवेल मनपा को फुलटाईम स्वास्थ्य अधिकारी मिलने की खबर है. मिली जानकारी के अनुसार स्वास्थ्य मंत्रालय ने पालघर के जिला प्रशिक्षण केन्द्र के प्रशिक्षक आनंद गोसावी को पनवेल मनपा का पुर्णकालिक स्वास्थ्य अधिकारी नियुक्त किया है. पनवेल मनपा आयुक्त सुधाकर देशमुख की मानें तो पूर्णकालिक स्वास्थ्य अधिकारी के आने से पनवेल में आरोग्य सेवाओं को और बेहतर बनाने में मदद मिलेगी.