कामगारों का देशव्यापी निषेध आंदोलन

  • देश की सरकारी स्वास्थ्य सेवा मजबूत करें

वर्धा. योजना कामगार व अन्य क्षेत्र में कार्यरत मजदूरों की प्रलंबित मांगों को लेकर शुक्रवार, 3 जुलाई को देशव्यापी निषेध आंदोलन किया गया़ जिले में ऑल इंडिया ट्रेड युनियन कांग्रेस (आयटक) के नेतृत्व में विविध ठिकाणो पर कामगारो ने प्रदर्शन किया़ 

केंद्र सरकार पेट्राल-डिजल की मूल्यवृध्दी वापिस ले़ रद्द किया गया संविधान 44 मजदूर कानून व किये गए गए बदलाव पिछे लिये जाए़ अंगणवाडी सेविका, सहायिका, आशा वर्कर, शालेय पोषण आहार कर्मी, स्वास्थ्य उपकेंद्र में अंशकालीन स्त्री परिचर व एनएचएम कर्मचारियों को सरकारी कर्मी का दर्जा प्रदान करें. कोरोना की तर्ज पर इन सभी को सुरक्षा प्रदान करें. एकात्मीक बालविकास सेवा योजना का किया गया निजीकरण केंद्र सरकार पिछे ले़ लॉकडाऊन के कारण स्कूल बंद होने से शापोआ कर्मचारियों को आर्थीक मदद प्रदान करें.लॉकडाऊन काल में भेजा गया इलेक्ट्रीक बिल माफ करें, लोकसभा की नई इमारत का नर्मिाण करने की बजाए देश की सरकारी स्वास्थ्य सेवा मजबूत करें, इलेक्ट्रीसीटी संशोधीत बिजली बिल माफ करें.

सहित महत्वपूर्ण 15 मांगों को लेकर निषेध आंदोलन किया गया़ जिलाधिकारी, आंबेडकर चौक, शिवाजी चौक सहित विविध ठिकाणो पर कामगारो ने यह आंदोलन किया़ सरकार के खिलाफ नारेबाजी की गई़ निवेदन की प्रति जिलाधिकारी के माध्यम से प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री को भेजी गई़ आंदोलन में आयटक के दिलीप उटाणे, मनोहर पचारे, विजया पावडे, वंदना कोलणकर, असलम पठाण, सुरेश गोसावी, गुणवंत डकरे, ज्ञानेश्वरी डंभारे, मैना उईके, मंगला इंगोले, विमल कौरती, सुनंदा आखाडे, शोभा तिवारी, रेखा काचोले, रंजना तांबेकर, माला भगत, शोभा सायंकार, सुरेखा रोहणकर, बबिता चिमोटे, वंदना बाचले, सुनीता टिपले, अरुणा नागोसे, ज्योती कुलकर्णी, माला कुत्तरमारे, प्रज्ञा ढाले सहित अन्य महिला, पुरुष कामगार बडी संख्या में शामील हुए थे़