72 माह से किसानों को गुमराह कर रही मोदी सरकार

  • किसान नेता विजय जावंधिया ने लगाया आरोप

वर्धा. मोदी सरकार ने कोरोना महामारी में निकाले तीन बिल किसानों के हित में नही है, बल्कि, मोदी सरकार 72 माह से किसानों को नए-नए सपने दिखाकर केवल गुमराह कर रही है. ऐसा आरोप किसान नेता विजय जावंधिया ने लगाया है.

खर्च पर 50 फीसदी मुनाफा जोडकर दाम देने का वादा मोदी सरकार गत 72 माह में पूरा नही कर पायी है. किसानों की आय दूगनी भी नही हुई. इन वादों से मुक्त होने के लिए मोदी सरकार ने तीन कानून खडे किए है. पंजाब-हरियाना- उत्तर प्रदेश के किसानों को गारंटी मूल्य का महत्व समझ में आया है. अन्न महामंडल की खरीदी बंद हुई तो 1200-1400 रुपए में गेहूं-धान बाजार में बेचना मुश्किल होगा, यह बात ध्यान में आयी है. किसानों के इस आंदोलन से मोदी सरकार को बार-बार यह घोषणा कर झांसा दे रही है.

समर्थन मूल्य रहेगा, बाजार समिति कायम रहेगी, करार के तहत खेती कानून में बदलाव करने सरकार तैयार है, जीवनावश्यक वस्तुओं का कानून सरकार ने रद्द किया है. परंतु प्याज के दाम बढते ही प्याज निर्यात बंद कर आयात शुरु की. खाद्य तेल का यातायात कर 10 फीसदी से कम किया. दाल की आयात पर 20 फीसदी आयात कर कम किया. 4 लाख टन तुअर आयात के लाइसेंस दिये, जिससे तुअर के दाम 8000 क्विंटल से 5500-5800 तक नीचे गिर गए.

इन सब बातों से किसान सरकार पर कैसे भरोसा करे? मोदी सरमार नीम कोटेड युनिया का नियमित प्रचार करती है. परंतु मोदी सरकार ने युरिया की सबसीडी कम की तथा यह पैसे पीएम किसान सम्मान निधि से किसानों को दिये. मनमोहनसिंह सरकार ने वर्ष 2012 में विश्व बाजार से 384 डॉलन प्रति टन 1100 से 1200 प्रति 50 किलो के तहत युरिया आयात की थी व किसानों को 285 रुपए के तहत बेचा था. परंतु मोदी सरकार आज 220 डॉलर प्रति टन के तहत आयात करती है, यानि 750 से 800 रुपए के तहत किसानों को बेचती है.

इसका अर्थ मोदी सरकार ने एक 50 किलों के बोरी की सबसीडी 400 रुपए से कम की है. यही पैसे 6000 रुपए प्रति किसान प्रति वर्ष दे रही है. इसे चालाखी या गुमराह करना ही कह सकते है. आंदोलन करनेवाले किसानों का मोदी सरकार अंत न देखे, यह कानून एक वर्ष के लिए स्थगित रखकर किसानों का विश्वास संपादन करें, ऐसी मांग किसान नेता विजय जावंधिया ने की है.