Russia and America

बर्लिन. अमेरिका और रूस के वार्ताकारों के बीच वियना में परमाणु हथियार नियंत्रण पर वार्ता संपन्न हुई। वार्ता का उद्देश्य फरवरी में खत्म हो रही ‘न्यू स्टार्ट’ संधि के स्थान पर नया समझौता करना है। परमाणु हथियारों पर लगाम लगाने के लिए दुनिया के दो बड़े नाभिकीय हथियारों वाले देशों के बीच न्यू स्टार्ट अंतिम संधि है। अमेरिकी वार्ताकार मार्शल बिलिंग्सलिया ने मंगलवार को संवाददाताओं से कहा कि उच्च स्तरीय ‘‘लंबी चर्चा” सोमवार की देर रात खत्म हुई और यह काफी सकारात्मक रही जिसमें सरकार के कई तकनीकी कार्यकारी समूहों के लिए मुद्दे की गहराई तक जाने का अवसर मिला और जुलाई के अंत या अगस्त की शुरुआत में दूसरे दौर की वार्ता का रास्ता साफ हुआ।

उन्होंने कहा, ‘‘दोनों पक्ष वार्ता के अंत में इस बात पर सहमत हुए कि न्यू स्टार्ट संधि पर हस्ताक्षर होने के बाद से सामरिक माहौल में काफी बदलाव आया है।” उन्होंने कहा, ‘‘हम सब 10 वर्ष पहले की बात याद करें, दुनिया वास्तव में काफी बदल गई है।” न्यू स्टार्ट संधि पर 2010 में हस्ताक्षर हुए थे, जिसमें अमेरिका और रूस के लंबी दूर के परमाणु हथियारों और लांचरों की संख्या सीमित करने का प्रावधान है। अमेरिका ने पिछले वर्ष रूस के साथ मध्यम दूरी की परमाणु बल संधि (आईएनएफ) को रद्द कर दिया था जिसके बाद दोनों देशों के बीच यह अंतिम परमाणु हथियार समझौता बन गया।

शीत युद्ध के समय के समझौते का दोनों देश एक-दूसरे पर उल्लंघन करने के आरोप लगाते रहे। आईएनएफ की इसलिए भी आलोचना होती रही कि इसमें चीन या मिसाइल तकनीक को कवर नहीं किया गया। न्यू स्टार्ट को परस्पर सहमति से पांच वर्षों के लिए बढ़ाया जा सकता है।

उन्होंने कहा, ‘‘समय खत्म होता जा रहा है।” अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने न्यू स्टार्ट को ओबामा प्रशासन का ‘‘एक खराब समझौता” करार दिया और यह स्पष्ट नहीं है कि वह इसे आगे बढ़ाने पर सहमत होंगे या नहीं। ब्रूसेल्स में नाटो के महासचिव जेन्स स्टोलटेनबर्ग ने कहा कि भविष्य के किसी भी समझौते में वह चाहेंगे कि चीन को भी भागीदार बनाया जाए और फिलहाल वह चाहेंगे कि न्यू स्टार्ट का विस्तार हो।

बिलिंग्सलिया ने कहा, ‘‘अमेरिका हथियारों की दौड़ में शामिल नहीं है।” बिलिंग्सलिया ने कहा कि वह ‘‘किसी को शामिल करने या बाहर करने” पर फैसला नहीं कर सकते लेकिन कहा कि अमेरिका का मानना है कि ब्रिटेन और फ्रांस के पास काफी कम परमाणु हथियार हैं और उन्हें समझौते में शामिल नहीं किया जाना चाहिए, जैसा कि रूस चाहता है।

चीन को समझौते में शामिल करने का प्रयास काफी हास्यास्पद रहा जब सोमवार को बिलिंग्सलिया ने वार्ता की मेज का एक फोटो ट्वीट किया जिसमें खाली सीट के सामने चीन का झंडा लगा हुआ था और उन्होंने लिखा, ‘‘चीन दृश्य में नहीं है।” चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता झाओ लिजियान ने मंगलवार को कड़ी आपत्ति दर्ज कराते हुए कहा कि ‘‘इस तरीके से ध्यान आकर्षित करना अमेरिका के लिए न तो पेशेवर रवैया है न ही वह गंभीर है।” (एजेंसी)