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    नई दिल्ली. अफगानिस्तान (Afghanistan) की राजधानी काबुल (Kabul) से आ रही एक बड़ी खबर के अनुसार यहां बीते देर रात हुए सीरियल ब्लास्ट (Serial Blast) में अब तक 16 लोगों की मौत हो चुकी है। दरअसल ये धमाके हजरत जकारिया मस्जिद के आसपास हुआ है। वहीं मस्जिद में 7 लोगों के मारे जाने की खबर है। घटना में अब तक 22 लोग घायल हो गए हैं। 

    इस घटना बाबत काबुल पुलिस के कमांडर ने बताया कि, उक्त विस्फोट तब हुआ जब लोग मस्जिद के अंदर थे। वहीं मस्जिद के बाद कुछ दूर पर एक मिनी वैन में हुए तीन बम विस्फोट में 9 यात्रियों के मारे जाने की भी खबर है।उक्त मामले में तालिबान ने जानकारीदेते हुए बताया कि, मिनी वैन में हुए विस्फोटों की जिम्मेदारी इस्लामिक स्टेट (आईएस) से संबद्ध एक स्थानीय समूह ने ली है। 

    इधर घटना पर ‘काबुल इमरजेंसी हॉस्पिटल’ ने बताया कि मस्जिद में बमबारी के कारण घायल हुए 22 लोग अस्पताल लाए गए, जिनमें से पांच की अब तक मौत हो गई। काबुल में तालिबान पुलिस के एक प्रवक्ता खालिद जदरान ने बताया कि ‘पुलिस डिस्ट्रिक्ट 4′ की हजरत जकारिया मस्जिद में हुए विस्फोट के बारे में अभी और कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है।  

    जदरान ने कहा, ‘‘जब मस्जिद में विस्फोट हुआ, उस समय लोग शाम की नमाज के लिए एकत्र हुए थे।” इस बीच, बाल्ख प्रांत में तालिबान के प्रवक्ता मोहम्मद आसिफ वजीरी ने बताया कि मजार-ए-शरीफ शहर में तीन मिनीवैन को निशाना बनाया गया और उनमें विस्फोटक उपकरण रखे गए। उन्होंने बताया कि विस्फोटों में नौ लोगों की मौत हो गई और 15 लोग घायल हो गए।

    वहीं एक पुलिस अधिकारी ने अपनी पहचान गोपनीय रखे जाने की शर्त पर बताया कि मजार-ए-शरीफ में हताहत हुए सभी लोग देश में अल्पसंख्यक शिया मुस्लिम समुदाय के हैं। तो वहीं आईएस की समाचार एजेंसी ‘अमाक’ के जरिए बयान जारी करके सुन्नी आतंकवादी समूह ने मिनी वैन में हुए विस्फोटों की जानकारी दी। बयान में कहा गया है कि IS ने IED से तीन बसों को निशाना बनाया है।

    हालाँकि काबुल की मस्जिद में हुए हमले की जिम्मेदारी अभी तक किसी ने नहीं ली है. लेकिन ऐसा भ अंदेशा है कि  IS से संबद्ध क्षेत्रीय समूह ‘इस्लामिक स्टेट इन खोरासन प्रॉविंस’ ने यह हमला किया है। 

    गौरतलब है कि उक्त समूह 2014 से अफगानिस्तान में सक्रिय है और देश में नए तालिबान शासकों के लिए बड़ी सुरक्षा चुनौतियां पेश कर रहा है। अफगानिस्तान में पिछले साल अगस्त में सत्ता पर काबिज होने के बाद तालिबान ने पूर्वी अफगानिस्तान में IS के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की थी।