आंगनवाड़ी कर्मियों का आंदोलन, पोषण ट्रैकर ऐप मराठी में बनाने की मांग

    दिग्रस. केंद्र सरकार पोषण ट्रैकर एप मराठी में बनाए. सरकार ने सही फैसला नहीं लिया तो सरकार की ओर से दिए गए मोबाइल वापस कर दिए जाएंगे. ऐसी भूमिका दिलीप उटाने ने व्यक्त किया. केंद्र सरकार की दमनकारी परिस्थितियों के कारण आंगनवाड़ी कर्मचारी मानधन और कुपोषित बच्चे पोषाहार से वंचित होने की संभावना है. महाराष्ट्र में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता मराठी के बजाय अंग्रेजी में काम करने मजबूर है फिर से रजिस्टरों में जानकारी भरने का आदेश दिया गया.

    कुछ कर्मचारियों के पुराने रजिस्टर खत्म हो गए थे. उन्हें अपने खर्चे पर नए रजिस्टर खरीदने पड़े. इन तमाम मुश्किलों का सामना करते हुए केंद्र सरकार के एक नए ऐप न्यूट्रिशन ट्रैकर पर काम करने का आदेश दिया गया. इसने कई समस्याएं पैदा की हैं. उपलब्ध कराए गए कई कर्मचारियों के मोबाइल फोन खराब हैं. वह इस ऐप को डाउनलोड नहीं करते हैं. उन्हें अपने निजी मोबाइल पर ऐप डाउनलोड करने कहा जा रहा है. 

    समय पर नहीं मिलते डाटा रिचार्ज के पैसे

    बहुत से कर्मी के पास खुद का एक अच्छा स्मार्टफोन नहीं होता है. कुछ के पास है भी तो वह इसे अकेले इस्तेमाल नहीं करते, बल्कि अपने परिवार के सदस्यों के साथ साझा करते हैं. कई बच्चों की इस पर ऑनलाइन क्लास या परीक्षा चल रही है. गारंटी नहीं दे सकते कि फोन जब चाहें तब उपलब्ध होगा. साथ ही डाटा रिचार्ज का पैसा महीनों तक नहीं आता है. आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के मानधन को पोषण ट्रैकर में जोड़ने का निर्णय वापस लिया जाना चाहिए.

    आंदोलन का नेतृत्व राज्य कमेटी सदस्य रचना जाधव, जिलाध्यक्ष सविता काटयालमल, जिला सचिव गया सावलकर, रमा गजभार, अलका तोडसाम, मंगला गांवडे, वनिता वनेरकर, अनुसया वाटोड़े, कांता जयस्वाल, वनिता भगत, माया गायकवाड़, आशा कांबले, राजुमाला तिडके ने किया. गंगा लंबे, सुनीता मस्से, जीजा शेलके, तारा जाधव, सविता जाधव, सुनीता लोखंडे, मनीषा शिंदे, लीला मेश्राम, रेखा बोंदरे,आशा भलगे, शेखा यास्मीन, ज्योति एड्रस्कर, शोभा पत्रे, सुरेखा झाडे ने किया.