शक्ति अधिनियम महिलाओं के लिए एक प्रेरणा बनेगा

यवतमाल. महाराष्ट्र सरकार ने महिलाओं के खिलाफ अत्याचारों को रोकने के लिए शक्ति विधेयक के मसौदे को मंजूरी दी, महिलाओं के खिलाफ हिंसा के मामले में उत्तर प्रदेश के बाद महाराष्ट्र देश में दूसरे स्थान पर है. पुलिस को पंधरा दिनों के भीतर जांच पूरी करने की आवश्यकता होगी. अपराध की जांच 22 दिनों के भीतर पूरी होगी और विशेष अदालत को 25 दिनों के भीतर फैसला देना होगा. यह एक तथ्य है कि अपराध होने के बाद पुलिस की जांच का विशेष प्रयास होता है लेकिन नया कानून पुलिस को जांच पूरी करने के लिए एक विशेष समय देगा. यदि जांच 21 दिनों के भीतर पूरी नहीं होती है, तो क्यों नहीं? इसमें कोई समय व्यतीत नहीं होगा.

मुख्य बात यह है कि कानून प्रवर्तन और दंड के स्तर पर अलग होगा. कानून के तहत शक्ति कानून को अपराध की तीव्रता को देखकर दस साल से लेकर उमरकैद तक की सजा बढाई बढ़ाई जा सकती है. यह सजा का हिस्सा होगा जलद कार्रवाई यह शक्ति कानून का विशेष महत्वपूर्ण रहेगा. यवतमाल जिले में विविध सामाजिक संगठना तथा राजनीतिक क्षेत्र में कार्य करनेवाली विविध महिलाओं ने अपनी प्रतिक्रियाएँ साझा कीं.

शक्ति अधिनियम महिलाओं के लिए बहुत प्रेरणादायक है और यह सुरक्षा की दृष्टि से किया गया है, इसलिए राज्य सरकार का कदम सकारात्मक है और हम शक्ति अधिनियम का गर्मजोशी से स्वागत करते हैं जो महिलाओं की सुरक्षा के मामले में संतोषजनक है

महिलाओं को अब कानून की ढाल मिली

शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं के खिलाफ अत्याचार की घटनाएं हर दिन अखबार में रहती है. हिंगनघाट की घटना मानवता के लिए एक झटका है. सही मायने में शक्ति कानून करके महिलाओं की सुरक्षा के लिए ढाल साबित होगा. – कालींदा पवार, अध्यक्ष जिला परिषद, यवतमाल

विकृति पर अंकुश लगाया जाएगा

समाज में बढ़ती विकृति पर अंकुश लगाया जाएगा और इस कानून ने महिलाओं के लिए एक मिसाल कायम की है. बढ़ती हुई घटना पर किसी का ध्यान नहीं जाएगा. – रेखा धांदे, सामाजिक कार्यकर्ता नेरपसोपंत

जब तक सख्त कानून नहीं बनेंगे, उसके सिवा यह मानसिकता नहीं बदलेगी. दलित आदिवासी महिलाओं को निशाना बनाने वाले अत्याचारों की संख्या बढ़ रही है, इसलिए इस कानून का बहुत फायदा होगा. – प्रमोदिन रामटेके, समतापर्व प्रतिष्ठान यवतमाल.