राष्ट्रपति चुनाव के लिए अभी से विचार, क्या शरद पवार होंगे उम्मीदवार

    अगले वर्ष होने वाले राष्ट्रपति चुनाव के लिए अभी से विचार होना स्वाभाविक है. 2017 में इस पद पर रामनाथ कोविंद निर्वाचित हुए थे. उन्होंने पूर्व लोकसभा स्पीकर और विपक्ष की उम्मीदवार मीरा कुमार को हराया था. पक्ष-विपक्ष दोनों ने पिछड़े वर्ग के प्रत्याशी को मैदान में उतारा था. मीरा कुमार पूर्व केंद्रीय मंत्री जगजीवन राम की बेटी होने के अलावा भारतीय विदेश सेवा में रह चुकी थीं. रामनाथ कोविंद पूर्व प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई के सचिव रह चुके थे.

    बीजेपी के नेतृत्व में एनडीए की बहुमत वाली सरकार केंद्र में होने से राष्ट्रपति पद पर कोविंद का निर्वाचित होना स्वाभाविक था. अब प्रश्न उठता है कि क्या मोदी सरकार वर्तमान राष्ट्रपति को दूसरा 5 वर्षों का टर्म देना चाहेगी? इसके पूर्व देश में डा. राजेंद्र प्रसाद और डा. राधाकृष्णन 2 टर्म अर्थात 10 वर्षों तक राष्ट्रपति रहे थे. बीजेपी चाहे तो वर्तमान उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू को राष्ट्रपति पद का प्रत्याशी बना सकती है लेकिन राज्यसभा के सभापति के रूप में बीजेपी को उनकी अधिक जरूरत है. प्रधानमंत्री मोदी के ध्यान में वेंकैया नायडू की राजनीतिक अपरिहार्यता इतनी है कि वे उन्हें वर्तमान जिम्मेदारी से मुक्त नहीं करेंगे.

    बीजेपी की सबल स्थिति

    बीजेपी को आत्मविश्वास है कि मोदी सरकार चाहे जिसे राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाए, उसे इलेक्टोरल कॉलेज में एनडीए का बहुमत होने से सफलता मिलेगी. आबादी के अनुपात में राज्यों के विधायकों का मत-मूल्य तय होता है. यूपी जैसे सघन आबादी वाले राज्य के विधायक का मत-मूल्य कम आबादी के दक्षिणी राज्य की तुलना में अधिक रहेगा. पूर्वोत्तर राज्यों के जनप्रतिनिधियों का मत-मूल्य तो और भी कम रहता है. देश के 28 राज्यों में  से अधिकांश में एनडीए सत्तारूढ़ है. कांग्रेस की सिर्फ 4 राज्यों पंजाब, राजस्थान, छत्तीसगढ़ व झारखंड में सरकारे हैं. वैसे देखा जाए तो क्षेत्रीय पार्टियों का मत-मूल्य भी बहुत महत्व रखता है. इतने पर भी उम्मीदवार की लोकप्रियता का कुछ न कुछ प्रभाव अवश्य पड़ता है.

    प्रशांत किशोर की सक्रियता

    इस दौरान चर्चा है कि चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने सोनिया गांधी व राहुल गांधी से मुलाकात कर राष्ट्रपति चुनाव को लेकर चर्चा की. इसके पहले वे दो बैठकों में शरद पवार से लंबी चर्चा कर चुके थे. 2024 में होने वाले लोकसभा चुनाव के पहले राष्ट्रपति चुनाव में विपक्ष मोदी सरकार के साथ जोर-आजमाइश कर अपनी ताकत तौल सकता है. प्रशांत किशोर की इस चर्चा में राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के तौर पर एनसीपी अध्यक्ष व महाराष्ट्र के दिग्गज नेता शरद पवार का नाम सामने आया है. सभी जानते हैं कि पवार के सभी पार्टियों के शीर्ष नेताओं से निकट संबंध रहे हैं तथा यदि विपक्ष ने उन्हें प्रत्याशी बनाया तो सत्ता पक्ष में क्रॉस वोटिंग हो सकती है. वोट बंटने का पवार को फायदा मिल सकता है.

    पवार के राजनीतिक अनुभव और कूटनीतिक कौशल को टक्कर देने वाले किसी प्रत्याशी को खोज पाना एनडीए के लिए आसान नहीं होगा. उनकी सीनियारिटी और 80 वर्ष की उम्र में भी उनकी सक्रियता का लोहा सभी मानते हैं. महाराष्ट्र में पवार की वजह से ही आघाड़ी सरकार टिकी हुई है और उसे हिला पाने में बीजेपी नाकाम होती रही है. कांग्रेस देश की प्रमुख विपक्षी पार्टी है. यदि वह पवार के नाम पर अनुकूलता दिखाती है तो मोदी सरकार व बीजेपी के लिए यह एक बड़ी चुनौती होगी. क्षेत्रीय पार्टियों को भी अपने साथ लेने में पवार सफल हो सकते हैं. देखना होगा कि राजनीति के इवेंट मैनेजर प्रशांत किशोर के प्रयास क्या रंग लाते हैं!