केंद्र की गलत नीति के कारण किसान और सहकार क्षेत्र खतरे में

  • सार्वजनिक निर्माणमंत्री अशोक चव्हाण का केंद्र सरकार पर हमला
  • संगमनेर चीनी मिल में क्रशिंग सीजन की शुरूआत

अहमदनगर. राज्य के सहकार क्षेत्र में सही मायने में ग्रामीण क्षेत्र ने नंदनवन का काम किया है, लेकिन मौजूदा केंद्र सरकार की गलत नीतियों के कारण राज्य के किसान और सहकार क्षेत्र खतरे में हैं. ऐसा आरोप महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री और सार्वजनिक निर्माण मंत्री अशोक चव्हाण ने लगाया.

समस्या से ध्यान भटका रही सरकार

संगमनेर के सहकार महर्षि भाऊसाहब थोरात चीनी मिल में चीनी क्रशिंग सीजन का शुभारंभ हुआ. इस समारोह में चव्हाण बोल रहे थे. कांग्रेस के महाराष्ट्र प्रभारी एच.के.पाटिल समेत राज्य के राजस्वमंत्री बालासाहब थोरात, सांसद राजीव सातव, विधायक डॉ.सुधीर तांबे, विधायक लहू कानडे, कांग्रेस के सचिव वामसी चांद रेड्डी, आशीष दुआ, बी.एम.संदीप, युवक कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष सत्यजीत तांबे, बाजीराव खेमनर, एड.माधवराव कानवडे, रणजितसिंह देशमुख, मोहन जोशी, पृथ्वीराज साठे, चीनी मिल के अध्यक्ष प्रताप ओहोल, उपाध्यक्ष संतोष हासे, इंद्रजीत थोरात, सुनंदा जोर्वेकर, मीरा शेटे, कार्यकारी संचालक जगन्नाथ घुगरकर आदि उपस्थित थे. चव्हाण ने कहा कि किसान और गरीबों की समस्या की अनदेखी करने के लिए सुशांत सिंह आत्महत्या, रिया चक्रवर्ती, टीआरपी जैसे मामले शुरू किए गए हैं.

एफआरपी के तहत दाम देना कठीन

चव्हाण ने कहा कि विगत 5 सालों में केद्र सरकार ने इंपोर्ट एक्स्पोर्ट समेत अधिकांश निर्णय पूंजीपतियों के हित में लिए हैं. सहकार आंदोलन को खत्म कराने का षडयंत्र रचा जा रहा है. अनेक चीनी मिल बंद पड़े हैं. किसानों को एफआरपी की रकम देना जरुरी है, लेकिन चीनी की कीमत वाजीब न होने के कारण सभी चीनी मिलें भी संकट में होने से किसानों को एफआरपी के तहत दाम देना कठीन हो रहा है. इस कारण राज्य की महाविकास आघाडी सरकार ने चीनी मिलों को 500 करोड़ रूपए का कर्ज उपलब्ध कराने की गारंटी दी है.

पूरे देश में मशहूर संगमनेर का सहकार मॉडल

एच.के.पाटिल ने कहा कि संगमनेर का सहकार मॉडल पूरे देश में एक मॉडल के रूप में साबित हुआ है. सहकार से ग्रामीण क्षेत्र में समृध्दि आई है. हजारों किसान सहकार के कारण सुखी हैं. संकट के समय में किसानों की सहायता कराने की परंपरा थोरात चीनी मिल ने निर्माण की है. स्वतंत्रता सेनानी स्वर्गीय भाऊसाहब थोरात देवरूपी इन्सान थे. दूरदृष्टि से आदर्श संस्थाओं का निर्माण करने के साथ उन्होंने बालासाहब थोरात जैसा कर्तत्ववान नेतृत्व दिया है.

2022 तक निलवंडे कैनाल से सूखाग्रस्त इलाकों में पानी पहुंचाया जाएगा

राजस्वमंत्री बालासाहब थोरात ने कहा कि थोरात कारखाना ने हमेशा ही संकट से रास्ता ढूंढने का काम किया है. एफआरपी से अधिक दाम किसानों को देने का काम कारखाना ने किया है. इसी कारण सभासद किसानों का कारखाना व्यवस्थापन पर भारी भरोसा है. मौजूदा स्थिति में कोरोना महामारी के कारण आर्थिक स्थिति खराब होने के बावजूद निलवंडे कैनाल द्वारा अकालग्रस्त परिसर में वर्ष 2022 तक पानी पहुंचाने के लिए सरकार ने निधि उपलब्ध कराने का काम किया है.