फसल बीमा के प्रति किसानों का रूझान कम हुआ, बीमा निकालने वाले किसानों की संख्या घटी

    अकोला. फसल बीमा के प्रति जिले के किसानों का रूझान धीरे धीरे कम होता जा रहा है. किसानों का कहना है कि फसलों का बीमा निकालने के बाद भी यदि उन्हें मुआवजा नहीं मिलता है तो बीमा निकालने से क्या फायदा? पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष फसल बीमा निकालनेवाले किसानों की संख्या घटी है.

    पिछले वर्ष 2 लाख 64 हजार किसानों ने फसल बीमा निकाला था, इस वर्ष 15 जुलाई तक 1 लाख 40 हजार किसानों ने फसल बीमा निकाला है इससे ही यह अनुमान लगता है कि किसानों का रूझान फसल बीमा के प्रति कम हुआ है.

    बीमा कंपनियों के प्रति किसानों की काफी नाराजी देखी जा रही है ऐसा अनुमान है. किसानों का कहना है कि पिछले तीन चार वर्षों से किसानों को काफी तकलीफ हो रही है. सोयाबीन और कपास की फसलों का नुकसान होने के बाद भी किसानों को बीमा कंपनियों की तरफ से जितना मुआवजा मिलना चाहिए था उतना मुआवजा नहीं मिल रहा है. इस विषय को लेकर अनेक किसानों ने अपनी नाराजी प्रकट की है. 

    समय बढ़ाने की जगह सरकार किश्त भरे

    वर्तमान समय में किसानों की परिस्थिति को देखते हुए सरकार ने फसल बीमा का समय बढ़ाने की जगह किसानों की किश्त भरनी चाहिए और उनकी रकम जमा करनी चाहिए, यह मांग विधायक रणधीर सावरकर ने की है. उनका कहना है कि नैसर्गिक विपदाएं, पिछले कुछ वर्षों से कृषि उत्पादन का घटना आदि विविध कारणों के साथ साथ कोरोना वायरस के कारण किसानों की आर्थिक स्थिति काफी खराब हो गई है. इस बिगड़ी हुई आर्थिक स्थिति में किसान फसल बीमा हेतु किश्त नहीं भर सकते हैं. इसलिए सरकार का काम है कि वह फसल बीमा हेतु किसानों की किश्त खुद भरे.