Sanjay kenekar

    औरंगाबाद. कोरोना महामारी में औरंगाबाद शहर (Aurangabad City) में सरकारी स्वास्थ्य सेवाएं कम पड़ रही हैं। उसमें सेवा देनेवाले कर्मचारियों की संख्या कम होने के साथ ही प्रशासकीय स्तर पर भी संवाद भी कम दिखाई दे रहा है। इसका मुख्य कारण प्रशासन के आला अधिकारियों में तालमेल न होना है। पिछले कुछ दिनों से कई कोरोना पॉजिटिव मरीज (Corona Positive Patient) सोशल मीडिया (Social Media) के सहारे अपनी व्यथा पेश कर रहे है। ऐसे में यह साफ है कि शहर में कोरोना वायरस के आतंक के लिए प्रशासन ही जिम्मेदार है। यह आरोप भाजपा शहराध्यक्ष संजय केणेकर (Sanjay Kenekar) ने आयोजित पत्रकार परिषद में लगाया।

    उन्होंने बताया कि प्रशासन में तालमेल न होने से वर्तमान में हॉस्पिटल में जरुरी इंजेक्शन, सलाइन, वेंटिलेटर, औषधियों की कमी हो रही है। हॉस्पिटल में यंत्र सामग्री, बेड, सुरक्षा साधन कम पड़ रहे हैं। निजी अस्पताल ने मरीजों से लूट खसोट शुरु की है। इस पर प्रशासन का कोई नियंत्रण नहीं है। ऐसे में इन सभी प्रश्नों पर विशेष लक्ष्य केन्द्रीत करने की जरुरत है। परंतु, प्रशासन निजी अस्पतालों की लूट खसोट पर पूरी तरह अनदेखी कर रहा है। 

    क्वारंटाइन सेंटर में भी सुविधा का अभाव

    क्वारंटाइन सेंटर में मरीजों को समय पर चाय, नाश्ता, खाना और पीने का पानी उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। होम क्वारंटाइन मरीजों को स्वास्थ्य और औषधि उपचार का योग्य मार्गदर्शन नहीं मिल पा रहा है। यहीं कारण है कि शहर में कोरोना वायरस आतंक मचा रहा है।

    चोरियों की संख्या में तेजी से इजाफा 

    केणेकर ने कहा कि एक तरफ कोरोना महामारी से लोग परेशान हैं, वहीं दूसरी तरफ प्रतिदिन के कई समस्याओं से परेशान नागरिकों की बिजली आपूर्ति खंडित की जा रही है। साथ ही मनपा कर्मचारियों की ओर से संपत्ति कर, पेयजल कर सख्ती से वसूला जा रहा है। इसके अलावा नागरी मित्र दल में नियुक्त पूर्व सैनिक शहर में दहशत मचाकर नागरिकों को परेशान किए हुए है। पुलिस प्रशासन की लापरवाही से कानून व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। आए दिन चोरियों की संख्या में तेजी से इजाफा होने से इस पर विशेष ध्यान देने की जरुरत है। पत्रकार परिषद में शिरीष बोरालकर, प्रमोद राठोड, भगवान घडामोडे, समीर राजूरकर आदि उपस्थित थे।