पार्ट ऑफ लाइफ है नेचुरोपैथी, बिना दवा से ठीक होते हैं लोग: डॉ. आभा जैन

    नागपुर. नेचुरोपैथी कुदरती तरीके से स्वस्थ जिंदगी जीने की कला है. इस पद्धति के जरिये व्यक्ति का उपचार बिना दवाइयों के किया जाता है. इसमें स्वास्थ्य और रोग के अपने अलग सिद्धांत हैं और उपचार की अवधारणाएं भी अलग प्रकार की हैं. आधुनिक जमाने में भले इस पद्धति की यूरोप में शुरुआत हुई हो, लेकिन अपने वेदों और प्राचीन शास्त्रों में अनेकों स्थान पर इसका उल्लेख मिलता है. मनुष्य की जीवनशैली और उसके स्वास्थ्य का अहम जुड़ाव है. चिकित्सा के इस तरीके में मुख्य रूप से प्रकृति के साथ जीवनशैली का सामंजस्य स्थापित करना सिखाया जाता है.

    इस पद्धति में खानपान की शैली और हाव-भाव के आधार पर इलाज किया जाता है. इसमें एक्युप्रेशर, हीलिंग, सुजोक थेरेपी आती है. इस चिकित्सा पद्धति से कैंसर, पैरालिसिस, थायरॉइड, घुटनों का दर्द, सोरायसिस, डायबिटीज-2 जैसी खतरनाक बीमारियां ठीक की जा सकती हैं. इससे स्किन क्वालिटी को भी इम्प्रूव कर सकते हैं. इन विचारों और कुदरती चिकित्सा पद्धति से रिमझिम ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट व पेनलेस थेरेपी सेंटर की संचालिका डा. आभा जैन ने जहां हजारों लोगों का इलाज किया, वहीं इंस्टीट्यूट में ट्रेनिंग देकर सैकड़ों को आत्मनिर्भर भी बनाया है. इस पद्धति के इलाज के बाद बहुत से मरीज आज स्वस्थ जीवन जी रहे हैं.

    ‘नवभारत बी ब्यूटीफुल’ में आभा बताती हैं कि उन्होंने अपने करिअर की शुरुआत एक ब्यूटीशियन के रूप में की थी, लेकिन ब्यूटी क्लीनिक में आने वाली महिलाओं की विविध तरह के दर्द की शिकायत को देखते हुए मेरी रुचि इस चिकित्सा पद्धति की तरफ बढ़ी. वे कहती हैं कि आज हम जीवन जीने का तरीका एलोपैथी चिकित्सा को नहीं बना सकते हैं. नेचुरोपैथी चिकित्सा पार्ट ऑफ लाइफ है.

    बहुत जल्द ठीक हो सकता है मेंटल डिसआर्डर

    आभा बताती हैं कि इस चिकित्सा से मेंटल डिसआर्डर बहुत जल्दी ही ठीक होता है. इससे चिड़चिड़ापन, बच्चों के मोबाइल देखने की आदत, डिप्रेशन जैसी अवस्था भी ठीक होती है. महामारी में लोग एंटी बायोटिक लेने के बाद भी जहां ठीक नहीं हुए, वहीं एक्युप्रेशर, सुजोक, हीलिंग जैसी नेचुरोपैथी पद्धति से जल्द ठीक हुए हैं. 7 बार विदेश यात्रा करने के बाद उन्होंने पाया कि वहां की महिलाएं दवाएं नहीं खातीं, बल्कि इस चिकित्सा पर उन्हें अधिक विश्वास है.

    वे कहती हैं कि मानव शरीर बायो-एनर्जी फील्ड पर चलता है. एनर्जी में डिस्टर्बनेस होने से बीमारियां होती हैं. एक बार दवाओं का साइड इफेक्ट हो सकता है, लेकिन पेनलेस थेरेपी में किसी तरह का साइड इफेक्ट नहीं होता. नेचुरोपैथी, उपचार का न केवल सरल और व्यावहारिक तरीका प्रदान करता है, बल्कि यह तरीका स्वास्थ्य की नींव पर ध्यान देने का किफायती ढांचा भी प्रदान करता है. स्वास्थ्य और खुशहाली वापस लाने के कुदरती तरीकों के कारण यह काफी पापुलर हो रहा है. वे बताती हैं कि लोगों को अवेयर करने के लिए जेसीआई, लायंस क्लब और रोटरी में सेमिनार्स भी हो चुके हैं.

    इससे कई बीमारियां ठीक होती हैं. इसके कुछ टिप्स इस प्रकार हैं-

    सुजोक, हीलिंग थेरेपी से क्या होता है?

    सुजोक और हीलिंग थेरेपी से इम्युनिटी को बढ़ाने के साथ ही बालों की क्वालिटी को अच्छा किया जा सकता है.

    एक्युप्रेशर से किस तरह लाभ होता है?

    एक्युप्रेशर प्वाइंट वात, पित्त और कफ को बैलेंस करता है. एक्युप्रेशर के सारे प्वाइंट्स हाथ और पांव में होते हैं.  

    स्वस्थ शरीर के लिए क्या करना चाहिए?

    स्वस्थ शरीर के लिए स्माइल मेडिटेशन करना बहुत जरूरी है. दिन भर में 4 से 5 लीटर पानी पीना चाहिए. इससे स्किन चमकदार रहती है.

    माइक्रो करंट थेरेपी से क्या होता है?

    माइक्रो करंट थेरेपी बहुत ही महत्वपूर्ण होती है. इससे सेल्स रेजोनेंट होते हैं. शरीर के सेल्स की ऊर्जा बढ़ती है.

    इस चिकित्सा पद्धति से क्या-क्या ठीक हो सकता है?

    इस चिकित्सा पद्धति से कई तरह की बीमारियां ठीक होती हैं. साथ ही पिगमेंटेशन व झुर्रियां भी ठीक होती हैं.