भंडारा में साप्ताहिक अवकाश ने रखी लाज : शेष हिस्से में भारत बंद को मिलाजुला असर

भंडारा. किसी भी तरह की हडताल का असर जिलामुख्यालय भंडारा शहर से आंका जाता है. मंगलवार को भारत बंद था. दूसरी ओर मंगलवार को ही भंडारा व्यापार नगरी में साप्ताहिक अवकाश रहता है. जिससे बंद कराने के लिए किसी भी सिसासी पार्टी को पसिना नहीं बहना पडा. भंडारा को छोड शेष तहसील में भारत बंद के अवसर पर राजनीतिक दलों द्वारा सरकार के विरोध में प्रदर्शन किया गया. लेकिन जहां तक किसान के नाम पर भारत बंद की बात रही. कहीं भी किसान सडक पर उतरकर विरोध प्रदर्शन करते हुए नहीं दिखा. सब्जियां की दुकानें हमेशा की तरह खुली रही. जिले की सबसे बडी भंडारा स्थित सब्जी मंडी में हमेशा की तरह पूरे जिले से आए किसानों अपनी सब्जियों की बिक्री की.

जनजीवन सामान्य

भंडारा में मंगलवार को साप्ताहिक अवकाश होता है. जिससे शहर में भारत बंद को लेकर किसी भी संगठन ने किसी तरह की जोरजबरदस्ती नहीं दिखाई. जनजीवन पूरी तरह से सामान्य था. साग सब्जी की छोटी बडी दुकानें शुरू थी. आटो रिक्शा, साइकिल रिक्शा से लेकर एसटी महामंडल की बसें भी हमेशा की तरह फेरियां करते हुए दिखाई दी. वहीं कानून एवं सुव्यवस्था के लिए पुलिस को माथापच्ची नहीं करनी पडी.

किसानों के समर्थन में भारत बंद को ऐलान किया गया था. बैंकिंग से लेकर अन्य ट्रेड युनियनों में भी बंद का समर्थन किया था. लेकिन मंगलवार को बैंकिग एवं सभी जरूरी सेवाएं हमेशा की तरह जारी थी. भंडारा जिला मुख्यालय में जितने भी विरोध प्रदर्शन हुए. उसमें किसान नहीं दिखाई दिए. लेकिन किसानों की मांगों को लेकर सियासी पार्टियों ने जरूर आवाज उठाई.

केंद्र सरकार ने पारित किए नये कानून किसानों के विरोध में होने से इन कानून को रद्द करने की मांग को लेकर दिल्ली में किसानों का आंदोलन शुरू है. मंगलवार को संपूर्ण देशभर में बंद का आह्वान किया गया था. इस आह्वान को जिले में अच्छा प्रतिसाद मिला. शहर परिसर में संमिश्र तो ग्रामीण परिसर में बंद रखा गया. बाईक रैली निकालकर दुकाने बंद की गयी. तो कहीं जेलभरो आंदोलन किया गया. 

भंडारा में आंदोलनकारियों को किया गिरफ्तार 

भंडारा में किसानों के भारत बंद आंदोलन को राष्ट्रीय ओबीसी महासंघ जय जवान जय किसान संगठन के साथ महाविकास आघाडी के कार्यकर्ताओं ने हिस्सा लिया था. यहां के आंदोलकारियों को पुलिस ने गिरफ्तार कर कुछ समय में छुडा गया. आंदोलन में राष्ट्रीय ओबीसी महासंघ के संयोजक डा. मुकेश पुडके, सदानंद इलमे, डा. केशव बांते, जय जवान जय किसान संघटन के जिलाध्यक्ष सचिन घनमारे, अंबादास मंदुरकर, उमराव सेलोकर, संजय मते, मनोज बोरकर, अनिल सुखदेवे, के.झेड. शेंडे, मुरलीधर भर्रे, रोशन उरकुडे, भगीरथ धोटे, माधवराव फसाटे, डा. विनोद भोयर, आदि ने हिस्सा लिया था. 

अडयाल में बंद 

दिल्ली में शुरू होनेवाले आंदोलन को समर्थन देते हुए पवनी तहसील के अडयाल परिसर में सख्ती से बंद किया गया था. किसान संगठन व व्यापारियों ने बाजारपेठ बंद रखकर स्वयं होकर हिस्सा लिया. राकां, कांग्रेस, शिवसेना व आदि मित्र पार्टियों के कार्यकर्ता ने शहर में घुमकर केंद्र के विरोध में निषेध जताया. इस अवसर पर मनोज कोवासे, मुनिश्वर बोदलकर, सूरज शेंडे, केतन रामटेके, इजाज खान, आशिक नैतामे, दिशांत कासारे, तुषार कराडे, आशीष जांभूळकर, भारत कांबले के साथ अन्य कार्यकर्ताओं ने हिस्सा लिया. 

गोबरवाही में बंद का कोई असर नहीं 

गोबरवाही, नाकाडोंगरी, चिखला, सितासावंगी, डोंगरी बुज, गर्रा बघेडा आदि व्यापारिक केंद्र पर भारत बंद का कोई असर नहीं हुआ. धान केंद्र पर धान खरीदी शुरू रही. किसानों को कोई समर्थन नहीं मिला. कुछ नेताओं ने बंद करने का प्रयास किए किंतु उन्हें सफलता नहीं मिली. सभी व्यापारिक गतिविधियां प्रतिदिन की तरह शुरू रही. 

ठाणा गाव बंद 

दिल्ली में मोदी सरकार ने कृषी व किसान संदर्भ में पारीत किए 3 कृषि विषयक कानून के विरोध में केंद्र सरकार के किसान विरोधी अन्यायकारी नीति के विरोध में मंगलवार को देशभर में बडी संख्या में किसान आंदोलन कर रहे है. विविध किसान संगठन ने मंगलवार को भारत बंद पुकारा था. इसमें कांग्रसे, राका, शिवसेना व अन्य मित्र पार्टीयों ने समर्थन दिया था. ठाणा गाव में पार्टियों के कार्यकर्ताओं ने ठाणा के चौक में किसानों के समर्थन में व केंद्र सरकार के विरोध में घोषणा कर प्रदर्शन किया गया. इस अवसर पर गाव के सरपंच शिवदास उरकुडे, दीनदयाल देशभ्रतार, ऋषी लेंडे, राजेश मेश्राम (पं.स. सदस्य), देवेंद्र डुंभरे (पूर्व उपसरपंच-ठाणा), शरद धांडे (शिवसेना शाखा-प्रमुख ठाणा), पांडुरंग निशाणे, मुन्ना भोंगाडे (जि.प. सर्कल प्रमुख-ठाणा कांग्रेस), बालु पडोले (पं.स. सर्कल प्रमुख-ठाणा काँग्रेस), श्रीहरि मथुरे, दौलत मथुरे, सचिन तोडकर, जगदीश बावनकुले, संदेश शामकुंवर, पिंटू काटकर, बी.राजु, निखील तिजारे, शुभम काटकर, इलमकर के साथ महाविकास आघाडी के सभी पार्टी के पदाधिकारी, कार्यकर्ता बडी संख्या में उपस्थित थे.