बोगस आदिवासियों पर हो फौजदार कार्रवाई

  • आफ्रोट संगठन का विधायक धोटे को निवेदन

राजुरा. पिछले सात दशकों से बोगस आदिवासियों ने आदिवासियों के आरक्षित नौकरियां हासिल कर सरकार को गुमराह कर आदिवासियों का हक छीना है इस मामले को आफ्रोट संगठन ने सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर कर ध्यान आकर्षित किया. सर्वोच्च न्यायालय ने राज्य की लगभग 12,500नौकरियों को अवैध प्रमाणित किया है. उक्त नौकरियों पर सच्चे आदिवासियों को लिए जाने का निर्देश राज्य सरकार को दिया है परंतु कुछ जनप्रतिनिधियों के आशीर्वाद से 12,500 बोगस आदिवासी अब गैरकानूनी तरीके से नौकरी पर कायम है. आफ्रोट संगठन एवं बिरसा क्रांति दल के पदाधिकारियों ने विधा. सुभाष धोटे से मिलकर बोगस आदिवासियों पर फौजदारी कार्यवाही कर प्रलंबित आदिवासी बेरोजगारों की विशेष पद भरती प्रक्रिया शुरू करने समेत विभिन्न मांगों का ज्ञापन उन्हें सौपा.

इस समय विधायक सुभाष धोटे ने इस प्रकरण में गंभीरता से ध्यान देते हुए विधानसभा में तारांकित प्रश्न उठाने का आश्वासन शिष्टमंडल को दिया. इस समय आफ्रोट के तहसील अध्यक्ष मधुकर कोटनाके, तहसील सचिव रमेश आडे,बंडू मडावी, संतोष कुलमेथे, अभिलाष परचाके, अरुण कुमरे, धीरज मेश्राम, सूरज मसराम, देवेंद्र वाळवे, संजय दलांजे, स्वरूप नरोटे, हरिदास कुंभरे, संदीप गेडाम, उदराम कातेवड, हरी किन्नाके, दिलीप रापंजे, श्रावण मडावी, रुषी मेश्राम, कवडू सोयाम, अमृत आत्राम, सुशील मडावी, सदानंद मडावी, बाबा कोडापे सहित अन्य कार्यकर्ता उपस्थित थे.