(Photo: Reuters)
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    नई पीढ़ी में फास्ट फूड का इतना प्रचलन बढ़ गया है कि बच्चों को घर का शीरा (हलवा), उपमा, आलू पोहा या चिवड़ा अच्छा ही नहीं लगता. उन्हें मोमोज, पास्ता, नूडल्स, मैगी, पिज्जा, सैंडविच, ब्रेड पकोड़ा या बरीटो चाहिए. साथ में सॉफ्ट ड्रिंक की चुस्कियां लेना भी उन्हें पसंद है. इस तरह की फूड हैविट या खानपान की आदतें पड़ जाने पर बच्चों को समझाना भी मुश्किल हो गया है कि ये सारे पदार्थ पोषक न होकर नुकसानदेह हैं. वे मानें तब ना! इन फास्ट फूड प्रोडक्ट में कैलोरी होती है लेकिन न्यूट्रीशन या पोषक तत्व नहीं होते.

    सबेरे दूध-रोटी या पराठा-चटनी-अचार का नाश्ता करने वाले लोगों का समय बीत गया. अब बच्चों या किशोरों की पसंद बिल्कुल भिन्न है. वे स्वाद के चक्कर में पोषण को भूल जाते हैं. विश्व प्रसिद्ध कंपनी नेस्ले ने माना है कि उसके 60 प्रतिशत फूड और ड्रिंक्स प्रोडक्ट सेहतमंद नहीं हैं. इस कंपनी के 2 उत्पाद विश्व के कोने-कोने में मशहूर हैं, ये हैं मैगी और नेस्कैफे. कंपनी ने खुद कहा कि कुछ प्रोडक्ट ऐसे हैं जो सुधारने की कोशिश के बावजूद कभी स्वास्थ्यप्रद या हेल्दी नहीं रहे. यह अच्छी बात है कि नेस्ले अपने 60 फीसदी प्रोडक्ट को अस्वास्थ्यकर पाए जाने के बाद उनमें सुधार करना चाहती है. कंपनी ने दावा किया कि उसने अपने प्रोडक्ट में शुगर और सोडियम की मात्रा को घटाया है. पिछले 7 वर्षों में नमक व शक्कर की मात्रा 14-15 प्रतिशत तक कम की गई. कंपनी मिल्क, इंस्टेंट नूडल्स, सूप, चॉकलेट व कॉफी का निर्माण करती है.

    नेस्ले के पहले पेप्सिको और मैकडॉनल्ड जैसी कंपनियों पर भी स्वास्थ्य के लिए हानिकारक पदार्थ बेचने के आरोप लगे थे जिनसे मोटापा बढ़ता है. नेस्ले ने अपने मानेसर स्थित आर एंड डी सेंटर से वैकल्पिक स्वास्थ्यप्रद प्रोडक्ट तैयार करने को कहा है. ऐसे में अब कंपनी पालक व आटे की मैगी तथा फ्रूट और नट्स की मंच चॉकलेट बनाएगी. उसे पोषक व संतुलित आहार पर ध्यान देना होगा क्योंकि शक्कर व नमक का अधिक सेवन स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है. कंपनी सेरेलैक, नरिश, एव्रीडे, मिल्कमेड, मैगी नूडल्स, कैचप, सूप, पास्ता, किटकैट, मंच, पोलो, माइलो व नेस्कैफे का उत्पादन करती है.