प्रतीकात्मक तस्वीर
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    नई दिल्ली: विश्व बाल दिवस से पहले जारी एक अंतरराष्ट्रीय सर्वेक्षण में शामिल किये गये करीब 73 प्रतिशत युवा भारतीयों का मानना है कि देश में शिक्षा की गुणवत्ता अब पहले की तुलना में बेहतर हो गई है। संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (यूनिसेफ) और गेलप द्वारा भारत सहित 21 देशों में किये गये सर्वेक्षण ‘बदलता बचपन परियोजना’ से प्रदर्शित होता है कि भारत में सर्वेक्षण में शामिल किये गये 15 से 24 वर्ष आयु वर्ग के 57 प्रतिशत लोग और 40 साल से अधिक आयु के 45 प्रतिशत लोगों को लगता है कि शिक्षा सफलता में सबसे बड़ी भूमिका निभाती है।  

    जब शिक्षा की बात आती है तब पुरुषों और महिलाओं के लिए बीच अलग-अलग धारणाएं हैं। विश्व बाल दिवस 20 नवंबर को मनाया जाता है। सर्वेक्षण में कहा गया है, ‘‘सर्वेक्षण में शामिल की गई 40 वर्ष से अधिक आयु की करीब 78 प्रतिशत महिला प्रतिभागियों को लगता है कि बच्चों की शिक्षा उनके माता पिता के समय की तुलना में बेहतर है, जबकि अधिक उम्र के 72 प्रतिशत पुरुषों का भी यही मानना है।”  

    रिपोर्ट में कहा गया है, ‘‘इसके अलावा, 15 से 24 वर्ष आयु वर्ग की 59 प्रतिशत लड़कियां अन्य की तुलना में इस बात से कहीं अधिक सहमत हैं कि शिक्षा सफलता में एक भूमिका निभाती है। वहीं, 67 प्रतिशत लड़कियों को लगता है कि डिजिटल प्रौद्योगिकी ने बच्चों को शिक्षा में मदद की है, जबकि 59 प्रतिशत लड़कों का भी ऐसा ही मानना है।” सर्वेक्षण के नतीजों से यह भी प्रदर्शित होता है कि भारत में 71 प्रतिशत लोगों का मानना है कि बच्चों की आर्थिक स्थिति उनके माता पिता की तुलना में कहीं बेहतर रहेगी।   

    रिपोर्ट के मुताबिक भारत में 57 प्रतिशत किशोर व युवा प्रतिदिन इंटरनेट का इस्तेमाल करते हैं। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारत में 55 प्रतिशत किशोरों व युवाओं ने जलवायु परिवर्तन के बारे में सुना है, जबकि 42 प्रतिशत अधिक उम्र के लोगों ने ही यह सुना है।  रिपोर्ट में यह स्तब्ध कर देने वाली बात कही गई है कि भारत में ऐसे किशोरों व युवाओं का दूसरा सबसे बड़ा हिस्सा है जिनका मानना है कि बच्चों को दंडित करना शिक्षकों के लिए ठीक है, हालांकि यह व्यवहार सामान्य रूप से अस्वीकार्य है।   

    रिपोर्ट में कहा गया है कि 15 से 24 वर्ष आयु वर्ग के करीब 73 प्रतिशत किशोरों व युवाओं का मानना है कि शिक्षा की गुणवत्ता पहले की तुलना में अब बेहतर हो गई है। सर्वेक्षण में भारत से 1500 लोगों सहित 21 देशों से 21,000 से अधिक लोगों को शामिल किया गया, जो इस साल कोविड-19 की दूसरी लहर से पहले किया गया था। (एजेंसी)