खुले में हजारों क्विंटल धान, केंद्रों पर खरीदी प्रक्रिया ठप

गोंदिया. खरीफ मौसम में हलके धान की कटाई कार्य पूरा हो गया है, जिससे धान बाजार में बिक्री के लिए आ रहा है, लेकिन अब तक शासकीय धान खरीदी केंद्र शुरु नहीं होने से किसानों को परेशानी हो रही है. पहले से ही किसान प्राकृतिक आपदा के संकट का सामना कर रहे हैं. इसी में अब जिला मार्केटिंग फेडरेशन व आदिवासी विकास महामंडल की लापरवाही से किसानों पर फिर से संकट मंढराने लगा है. जिले में खरीफ व रबी मौसम में समर्थन मूल्य पर शासकीय धान खरीदी की जाती है. इसके लिए जिलाधीश दीपककुमार मीणा ने मार्केटिंग फेडरेशन के 70 व आदिवासी विकास महामंडल के 70 धान खरीदी केंद्रों को अनुमति दी है.

इसके साथ ही उक्त केंद्र शुरु होने की घोषणा की गई. जिससे अनेक किसान धान की बिक्री करने के लिए शासकीय धान खरीदी केंद्रों पर धान लेकर पहुंचे, लेकिन केंद्र अभीतक शुरु ही नहीं हुए हैं,ऐसे दृश्य सामने आ रहे है. नवेगांव बांध, देवरी परिसर में जिन संस्थाओं के केंद्र मंजूर हुए हैं, उन्होंने केवल नाम के लिए केंद्र शुरु दिखाए हैं, जबकि प्रत्यक्ष में केंद्रों पर खरीदी की कोई तैयारी नहीं है. किसानों द्वारा ट्रैक्टर व बैलगाड़ियों में भरकर लाया हजारों क्विटंल धान खुले में पड़ा है. इस बीच में यदि बारिश हो गई तो धान खरीदी केंद्रों पर किसानों के धान का नुकसान होने की पूरी संभावना है.

व्यापारियों को होगी परेशानी

इस बार शासकीय धान खरीदी केंद्रों पर हेराफेरी से बचने के लिए 7/12 व खसरा दर्ज करनेवाले गांवों का संबंधित केंद्रों में समाविष्ट किया गया है. जिससे इन केंद्रों पर ही धान खरीदी की जा सकेगी, जिससे निजी व्यापारियों को परेशानी होने की संभावना व्यक्त की जा रही है.  

केंद्र में 1,888 व अन्य 1,300 का भाव

शासन ने इस बार धान को 1,868 व 1,888 रु. प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य भाव घोषित किया है जबकि जिले में अब तक धान खरीदी केंद्र शुरु नहीं होने से किसानों को धान खरीदी केंद्रों के बाहर धान को बेचना पड़ रहा है. जिसका लाभ उठाकर निजी व्यापारी किसानों से 1,300 से 1,400 रु. प्रति क्विंटल भाव पर धान की खरीदी कर रहे हैं. ऐसे में किसानों को प्रति क्विंटल 400 से 500 रु. का घाटा सहन करना पड रहा है. इतना  ही नहीं  तो उन्हें बोनस से भी वंचित रहना पडेगा,ऐसी स्थिति निर्माण हो रही है.