Home remedies for children with diaper rash

-सीमा कुमारी

जब भी नवजात शिशु रोता है तो उसके माता पिता के लिए वो पल सबसे दुखदायी होता है, जब उनका शिशु किसी तकलीफ के कारण रोता रहता है. इसलिए, वो हर तरह से अपने बच्चे की देखभाल करते हैं. जैसे जब बच्चा रोता है तो सबसे पहले वो अपने बच्चे की भूख को दूर करने का सोचते हैं और फिर डायपर पहनाते हैं. कुछ बच्चों को डायपर के कारण डायपर रैश की समस्या हो जाती है, जिससे उन्हें रेडनेस, जलन व दर्द आदि होता है. 

नवजात बच्चे की त्वचा शुरुआत में बहुत ही संवेदनशील होती है, इसलिए चाहे आप कितने भी सजग हों, संक्रमण होने का खतरा रह ही जाता है. ये 5 से 15 महीने के बच्चों में बहुत आम बात होती है. इसके अलावा 5 महीने से कम उम्र में ही रैशेज होने की संभावना बहुत ज्यादा रहती है. डायपर रैश एक तरह की त्वचा की जलन होती है जो बैक्टीरियल या फंगल इन्फेक्शन की वजह से होते हैं. तो चलिए जानते हैं डायपर रैश का घरेलू उपचार क्या है?

डायपर रैश का घरेलू उपचार:

  • नारियल में एंटीबैक्टीरियल और एंटीफंगल गुण होते हैं. और नारियाल एक प्राकृतिक उपचार है. इसलिए  नारियल का तेल त्वचा के लिए सबसे सुरक्षित माना गया है. नारियल का तेल बच्चो को डायपर रैश हो जाने पर प्रभावित हिस्से में लगाएं. इससे डायपर रैशेज ठीक हो जाएंगे.
  • डायपर की फिटिंग शिशु के महत्वपूर्ण है. ध्यान रहे कि डायपर बहुत अधिक कसा या ढीला न हो. ज्यादा फिट वाले डायपर आपके शिशु की त्वचा को काट देंगे और ढीले फिट से रिसाव होगा,इसलिए डायपर का फिटिंग ऐसा होना चाहिए जिससे शिशु को आराम मिले.
  • एलोवेरा जेल की तासीर ठंडी होती है. जिस कारण यह रैशेज की वजह से होने वाले जलन से आराम दिला सकता है. इसलिए बच्चे के डायपर रैशेज पर एलोवेरा जेल लगा सकते हैं.
  • गंदा डायपर निकालने के बाद नवजात को कम से कम 10-15 मिनट तक वैसे ही रहने दीजिए, जिससे उसका शरीर पूरी तरह से सूख जाए.
  • साफ और सॉफ्ट सूती कपड़े से बने डायपर का इस्तेमाल करना चाहिए. जब रैश ने शिशु की कोमल त्वचा को प्रभावित कर रखा हो. शिशु की नाजुक त्वचा के लिए कपड़े का डायपर ही अच्छा रहता है.