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नयी दिल्ली. एक बड़ी खबर के अनुसार भारत (India) के खौफ के चलते बीते साल पाकिस्तान (Pakistan) ने विंग कमांडर अभिनंदन वर्धमान (Abhinandan Vardhmaan) को रिहा किया था। यही नहीं भारत को खुश करने के लिए ही पाकिस्तान ने अभिनंदन को छोड़ा था। यह बात खुद पाकिस्तान के पूर्व विदेश मंत्री ख्वाजा मोहम्मद आसिफ और पाकिस्तान असेंबली के पूर्व स्पीकर अयाज सादिक ने स्वीकार भी की है।  

Courtsey: Aditya Raj Kaul

पाकिस्तान डरा, बाजवा के पैर काँपे, हुए पसीने से लथपथ :

दरअसल पाकिस्तान की संसद में पाकिस्तान के पूर्व विदेश मंत्री ख्वाजा मोहम्मद आसिफ ने इस बात का खुलासा किया कि भारत के डर से पिछले साल विंग कमांडर अभिनंदन वर्धमान को पकिस्तान ने छोड़ा था। इस मुद्दे पर पाकिस्तान असेंबली के पूर्व स्पीकर अयाज सादिक का कहना था कि, ‘उस समय पाकिस्तान को यह डर सता रहा था कि कहीं भारत उस पर हमला न बोल दे। भारत के हमले की आशंका से उस समय पाकिस्तान के सेना प्रमुख कमर जावेद बाजवा के पैर भी कांपने लगे थे और चेहरे पसीने से लथपथ था। साफ़ था कि बाजवा को भारत के हमले का बड़ा डर सता रहा था।” सादिक ने यह भी कहा था कि, “विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी भीकांप रहे थे। भारत के  विंग कमांडर अभिनंदन को लेकर वो कह रहे थे कि खुदा के वास्ते उसे जाने दिया जाये। पाकिस्तान को इस बात का बड़ा डर था कि अगर इस पायलट अभिनंदन को रात 9 बजे तक रिहा नहीं किया गया तो भारत पाकिस्तान पर जरुर से हमला करेगा।”

संबित पात्रा ने घेरा राहुल गाँधी को: 

अब इस बात पर बीजेपी प्रवक्ता संबित पात्रा ने ट्वीट करते हुए राहुल गाँधी को घेरा और लिखा कि, “राहुल जी, आप सर्जिकल स्ट्राइक और एयर स्ट्राइक पर सवाल उठा रहे थे ना? जरा देखिए मोदी जी का क्या खौफ है पाकिस्तान में सरदार अयाज सादिक बोल रहे है पाकिस्तान की नेशनल असेंबली में की पाक के चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ के पैर कांप रहे थे और चेहरे पर पसीना था, कहीं भारत अटैक न कर दे! समझें?”

क्या था ‘अभिनंदन’ मामला?

गौरतलब है कि फरवरी 2019 में पाकिस्तान ने हमले के लिए अपने कुछफाइटर जेट भारत में घुस आये थे। जिसके जवाब में भारतीय वायु सेना के विंग कमांडर अभिनंदन वर्धमान ने मिग-21 में उड़ान भरी थी। इस घटनाक्रम के दौरान भिनंदन का विमान क्रैश हुआ और वे POK में जा गिरे। जहां उनको पाकिस्तान की सेना ने अपने गिरफ्त में ले लिया था। हालांकि इसके बाद पाकिस्तान पर काफी राजनीतिक और कुटनीतिक  दबाव बनाया गया था, जिसके बाद अभिनंदन को अटारी-वाघा बॉर्डर से भारत को सकुशल लौटाया गया था। उस वक़्त भारत की पकिस्तान के ऊपर ‘राजनीतिक और कुटनीतिक’ रूप से बहुत बड़ी जीत बताई गयी थी।