JKLF Chairman Mohammad Yasin Malik
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    नई दिल्ली. टेरर फंडिंग मामले में एनआईए की विशेष अदालत ने आतंकी और अलगाववादी नेता यासीन मलिक (Yasin Malik) को उम्रकैद की सजा सुनाई है। अदालत ने दो मामलों पर उम्रकैद की सजा सुनाई है। इसी के साथ 10 लाख का जुर्माना भी लगाया गया है। ज्ञात हो कि, मलिक ने आतंकवाद के वित्त पोषण के एक मामले अदालत ने 19 मई को दोषी करार दिया था। 

    ज्ञात हो कि, अलगाववादी नेता ने खुद पर लगे सभी आरोपों को स्वीकार किया था, जिनमें गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम कानून के तहत आरोप भी शामिल हैं। वर्तमान में यासीन मलिक अभी तिहाड़ जेल में बंद है। उस पर साल 1990 में एयरफोर्स के 4 जवानों की हत्या का भी आरोप है, जिसे भी उसनें खुद कबूल किया है।

    इन मामलों में मिली सजा 

    अदालत ने मलिक को कुल आठ मामलों में सजा सुनाई है। इनमें 120B में 10 साल की सज़ा और 10 हज़ार जुर्माना, 121 में उम्रकैद की सज़ा और 10 हज़ार जुर्माना, 121A में 10 साल की सज़ा 10 हज़ार जुर्माना, UAPA की धारा 13 में 5 साल और 5 हज़ार जुर्माना, UAPA की धारा 15 में 10 साल की सज़ा और 10 हज़ार जुर्माना, UAPA की धारा 17 में उम्रकैद सज़ा और 10 लाख का जुर्माना, UAPA की धारा 18 में 10 साल 10 हज़ार जुर्माना, UAPA की धारा 38 और 39 में 5 साल की सज़ा और 5 हज़ार का जुर्माना लगाया गया है।

    अदालत के बाहर फांसी दो-फांसी दो के लगे नारे 

    अदालत द्वारा सजा के ऐलान के बाहर मौजूद लोगों में बेहद नाराजगी देखी गई। लोगो ने अदालत के इस फैसले पर नाखुशी जताते हुए  यासीन मलिक को फांसी दो- फांसी दो के नारे भी लगाए। 

    मलिक पर कार्रवाई से पाकिस्तान को लगी मिर्ची

    अलगाववादी नेता को दोषी देने के पर पाकिस्तान को मिर्ची लग गई है। पिछले दिनों पाकिस्तान विदेश मंत्रालय ने भारतीय दूतावास प्रभारी को तलब कर उन्हें आपत्ति संबंधी एक दस्तावेज (डिमार्शे) सौंपा था, जिसमें कश्मीरी अलगाववादी नेता यासीन मलिक के खिलाफ “मनगढ़ंत आरोप” लगाए जाने की कड़ी निंदा की गई थी। 

    इसी के साथ पाक प्रधानमंत्री शहवाज शरीफ ने मलिक को बेकसूर बताते हुए कश्मीरियों की आवाज दबाने का आरोप लगाया।  इसी के साथ उन्होंने अन्य देशों से भारत के इस फैसले पर रोक लगाने और इसका विरोध करने की मांग की। पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान ने भी यासीन मलिक को दोषी ठहराए जाने को लेकर भारत की आलोचना की है। इसी के साथ पाक विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो ने संयुक्त राष्ट्र को पत्र लिख कर भारत पर दवाब बनाने की मांग की है। 

    कौन है यासीन मलिक  

    यासीन मलिक एक पेशेवर आतंकी है। साथ ही वो जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट का अध्यक्ष और अलगाववादी नेता है, जो पाकिस्तान के इशारे पर काम करता था। जानकारी दे दें कि यासीन मलिक 90 के दशक में कश्मीर में हुए कश्मीरी हिंदुओं के नरसंहार और पलयान में मुख्य रूप से शामिल रहा।

    इसके साथ ही इसी यासीन मलिक पर कश्मीर में आतंकवाद का समर्थन करने का भी आरोप है। इसके अलावा वो भारत में टेरर फंडिंग के मामले में भी अहम दोषी है। इतना ही नहीं, यासीन मलिक पर मुफ्ती मोहम्मद सईद की बेटी रुबैया सईद के अपहरण का भी गंभीर आरोप लगा चूका है।