नवरात्र पर भी भारी पड़ा कोराना, कलाकार हुए बेरोजगार

  • दिशा-निर्देश न मिलने से पसोपेश में कलाकार
  • क्या बिना डांडिया की धुन पर होगा डांडिया
  • 70 से 80 लाख का नवरात्र में होता था कारोबार

-ए. वाहिद काकर

जलगांव. कोरोना वायरस के कारण लागू किए गए लॉकडाउन ने कई तरह के व्यापार-व्यवसाय बुरी तरह से प्रभावित कर दिया है, इसमें गीत-संगीत और जागरण का काम करने वाले कलाकार भी प्रभावित हैं. करीब छह महीने से इससे जुड़े सैकड़ों लोग बेरोजगार हो चुके हैं. कुछ युवाओं ने तो इस क्षेत्र को छोड़कर दूसरे काम शुरू कर दिए हैं. इस तरह प्रकार की आपबीती खानदेशी लोक कलाकारों ने बताई. कोरोना वायरस और जगरण कार्यक्रम और नवरात्र में 70 से 80 लाख का कारोबार होता था, जो पूरी तरह से चौपट हो गया है. जिसके चलते कलाकार भी बेरोजगार हो गए हैं. क्या इस बार बिना संगीत श्रद्धालु और डांडिया की धुन के बिना होगा नव दुर्गा की पूजा, इस तरह की चर्चाएं फिलहाल युवा में जोरों पर है. प्रशासन की ओर से अभी तक किसी भी प्रकार की दिशा निर्देश जारी नहीं किए गए हैं. इस कारण कलाकार पसोपेश में हैं.

6 माह से नहीं हुए कोई कार्यक्रम

कोरोना के चलते इस बार नवरात्र में जगराता कार्यक्रम के कलाकारों को बुकिंग नहीं मिल रही है. इससे इन कलाकारों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है. सावन के महीने से ही जागरण और चौकी का कार्यक्रम मिलता था, पर पूर्ण लॉकडाउन के कारण कोई कार्यक्रम नहीं हुए.

नवरात्र पर नहीं मिलीं बुकिंग

अब नवरात्र की भी कोई बुकिंग नहीं मिली है. प्रभावित कलाकारों में देवी जागरण, ऑर्केस्टा संचालक, ढोल-बैंड वाले, म्यूजिशन, सिंगर, स्टेज डेकोरेटर, टेंट हाउस संचालक आदि शामिल हैं. खानदेश में त्यौहारी सीजन में ही 70 से 80 लाख रुपये का कारोबार होता है.

 इंतजार में घर पर बैठे कलाकार

संजय पाटिल ने कहा कि कुछ जगह कई साल से लगातार कार्यक्रम करते थे. इस बार वहां से भी बुकिंग नहीं आई है. 7 महीने से टीम से जुड़े 50 कलाकार घर पर बैठे हैं. जबकि एक बुकिंग में 1 लाख रुपये तक मिलते थे.

दिवाली से पहले स्थितियां ठीक होने की थीं उम्मीद

उम्मीद थी कि दिवाली से पहले स्थिति सामान्य हो जाएगी तो लोगों की जिंदगी ट्रैक पर आ जाएगी. हालांकि अब लग रहा है कि इसमें समय लगेगा. इसके चलते कलाकारों को बेरोजगार होना पड़ा है. युवाओं को हर साल इंतजार रहने वाला नवरात्रि भी सर पर आकर खड़ा हो गया है. वायरस के कारण इस बार बिना डांडिया के ही मां शेरा वाले की पूजा अर्चना करनी होगी.

हर साल जिले के विभिन्न स्थानों पर गुजराती समुदाय तथा राजस्थानी समुदाय भव्य पैमाने पर नौ गरबा का आयोजन करता लेकिन इस बार कोरोना संक्रमण सोशल डिस्टेंसिंग के कारण प्रशासन फिलहाल पूरी क्षमता से श्रद्धालुओं को पंडाल में आने की अनुमति देने के मूड में दिखाई नहीं दे रहा है जिसके चलते इस बार नवरात्र उत्सव पर कोरोना के संकट मंडरा रहे हैं.

नवरात्र में चलने वाले डांडिया उत्सव में गरबा देखने के लिए युवाओं की बड़े पैमाने पर भीड़ उमड़ती है, इसे काबू करना प्रशासन के लिए नाकों चने चबाने के बराबर होगा. वहीं कलाकारों के लिए कार्यक्रम करने भीड़ जुटने पर सरकार की गाइडलाइंस का पालन कराना आसान नहीं होगा.

-धर्मेंद्र सिंह, कलाकार