Navratri 2021
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    -सीमा कुमारी

    इस साल ‘शारदीय नवरात्रि ‘(Shardiya Navratri) 7 अक्टूबर, गुरुवार से शुरू हो रही है और 15 सितंबर को समाप्त होगी। नवरात्रि के नौ दिनों में मां दुर्गा के अलग-अलग रूपों की पूजा की जाती है। मान्यता है कि नवरात्रि के दौरान विधि-विधान से पूजा-अर्चना करने पर माता रानी अपने भक्तों पर कृपा बरसाती हैं। मां दुर्गा को प्रसन्न करने के लिए श्रद्धालु नौ दिनों का उपवास भी रखते हैं। नवरात्रि के दौरान कई बार तिथियों को घटने-बढ़ने के कारण नवरात्रि भी 8 या 9 दिन की होती है।

    ज्योतिष-शास्त्र के मुताबिक, इस साल चतुर्थी तिथि का क्षय होने से ‘शारदीय नवरात्रि’ आठ दिन की होगी। ऐसे में महाअष्टमी, महानवमी और दशमी तिथि में असमंजस की स्थिति बनी हुई है। आइए जानें महाअष्टमी, महानवमी और दशमी किस तारीख को मनाई जाएगी ?

    ज्योतिषों के अनुसार, एक ही दिन में दो तिथियां पड़ने से ‘नवरात्रि’ 8 दिन तक चलेगी। 9 अक्टूबर दिन शनिवार को तृतीया सुबह 7 बजकर 48 मिनट तक रहेगी, इसके बाद चतुर्थी शुरू हो जाएगी, जो अगले दिन 10 अक्टूबर दिन रविवार को सुबह 5 बजे तक रहेगी।

    इस साल नवरात्रि 7 अक्टूबर से शुरू होकर 14 अक्टूबर तक चलेगा। जबकि 15 अक्टूबर को ‘विजयदशमी’ यानी दशहरा मनाया जाएगा। ‘नवरात्रि’ में मां दुर्गा के नौ रुपों की पूजा अर्चना की जाती है। हर दिन मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूप का पूजन करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है। इस साल नवरात्रि आठ दिन के हैं। दरअसल इस बार चतुर्थी और पंचमी तिथि एक साथ पड़ रही है। ऐसे में 7 अक्टूबर से शुरू हो रहे ‘शारदीय नवरात्र’ 14 अक्टूबर तक रहेंगे।

    कब है ‘महाअष्टमी’?

    इस साल ‘महाअष्टमी’ 13 अक्टूबर (बुधवार) को पड़ रही है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, इस साल चतुर्थी तिथि का क्षय होने से शारदीय नवरात्रि आठ दिन के पड़ रहे हैं। ऐसे में 13 अक्टूबर को अष्टमी व्रत रखना उत्तम है। नवरात्रि के आठवें दिन महागौरी की पूजा की जाती है।

    कब है ‘महानवमी’

    पंचांग के अनुसार, इस साल महानवमी तिथि 14 अक्टूबर (गुरुवार) को पड़ रही है। नवमी के दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा का विधान है।

    महानवमी का आध्यात्मिक महत्व-

    पौराणिक कथाओं के मुताबिक , राक्षसों के राजा महिषासुर के विरुद्ध मां दुर्गा ने नौ दिनों तक युद्ध किया था। इसी कारण यह त्योहार नौ दिनों तक चलता है। देवी की शक्ति और बुराई पर जीत हासिल करने का यह अंतिम दिन होता है। जिसे ‘महानवमी’ कहते हैं।

    नवरात्र में मां के नौ रूपों को पूजा जाता है. जानते हैं इन रूपों के बारे में-  

    पहले दिन –  प्रथम नवरात्र में मां शैलपुत्री का पूजन किया जाता है।

    दूसरे दिन – द्वितीय नवरात्र में मां ब्रहाचारिणी का पूजन किया जाता है।

    तीसरे दिन – तृतीय नवरात्र में मां चन्द्रघण्टा का पूजन किया जाता है।

    चौथे दिन – चतुर्थ नवरात्र में कूष्माण्डा का पूजन किया जाता है।

    पांचवे दिन – पंचम नवरात्र में मां स्कन्दमाता का पूजन किया जाता है।

    छठे दिन – षष्ठ नवरात्र में मां कात्यायनी का पूजन किया जाता है।

    सातवें दिन – सप्तम नवरात्र में मां कालरात्री का पूजन किया जाता है।

    आठवें दिन – अष्टम नवरात्र में मां महागौरी का पूजन किया जाता है।

    नौंवे दिन – नवम् नवरात्र में  मां सिद्विदात्री का पूजन किया जाता है।

    मान्यता है कि इन दिनों में मां की भक्ति-भाव से पूजा-अर्चना करने से वे अपने भक्तों से प्रसन्न हो जाती हैं और भक्तों पर अपनी कृपा बरसाती हैं। इतना ही नहीं, ये नौ दिन सभी भक्तिमय रंग में रंग जाते हैं। मां को प्रसन्न करने के लिए व्रत रखे जाते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार इन नौ दिनों तक मातारानी पृथ्वी पर आती हैं और अपने भक्तों की मनोकामनाओं को पूर्ण करती हैं और उनके दुखों को हर लेती हैं।