इस दिन है भाद्रपद का दूसरा ‘प्रदोष’, इस तिथि को इस शुभ मुहूर्त में इस विधि से करें पूजा

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सीमा कुमारी

नई दिल्ली: सनातन धर्म में ‘प्रदोष व्रत’ (Pradosh Vrat) का विशेष महत्व है। यह व्रत देवों के देव महादेव की उपासना के लिए समर्पित है। पंचांग के अनुसार, माह में 2 प्रदोष व्रत रखे जाते हैं जिनमें से एक शुक्ल पक्ष और दूसरा कृष्ण पक्ष में रखा जाता है। श्रद्धालु इस दिन व्रत रखकर प्रदोष काल में अपनी मनोकामना लिए भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा आराधना करते है।

माना जाता है इस दिन व्रत रखकर जो भी भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा आराधना सच्चे मन से करते हैं उनकी मनोकामनाएं जरूर पूरी होती है। इस बार भाद्रपद मास का अंतिम ‘प्रदोष व्रत'(Pradosh Vrat 2023) 27 सितंबर दिन बुधवार को पड़ रहा है। जिसे ‘बुध प्रदोष व्रत’ भी कहते हैं। आइए जानें कब रखा जाएगा भाद्रपद मास का अंतिम प्रदोष व्रत।

तिथि

पंचांग के अनुसार, भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि 27 सितंबर सुबह 1 बजकर 45 मिनट से शुरू होगी और 27 सितंबर रात्रि 10 बजकर 28 मिनट पर समाप्त हो जाएगी। ऐसे में प्रदोष व्रत 27 सितंबर 2023, बुधवार के दिन रखा जाएगा। बुधवार का दिन होने के कारण इस दिन को बुध प्रदोष व्रत के नाम से भी जाना जाएगा। पंचांग में बताया गया है कि इस दिन प्रदोष काल शाम 6 बजकर 12 मिनट से रात्रि 8 बजकर 36 मिनट तक रहेगा।

पूजा-विधि

प्रदोष व्रत की पूजा करने के लिए सुबह के समय स्नान पश्चात व्रत का संकल्प लिया जाता है। इसके बाद शिव मंदिर जाकर या  घर के मंदिर में ही पूजा की जाती है। पूजा के लिए गंगाजल, दूध, बेलपत्र, चंदन और अक्षत आदि शिवलिंग पर अर्पित किए जाते है। इस व्रत में शिवजी के मंत्रों का जाप किया जाता है।  इस दिन भगवान शिव की आरती और कथा आदि सुने व गाए जाते है।

महिमा

सनातन धर्म में भाद्रपद में पड़ने वाले प्रदोष व्रत का बड़ा महत्व होता है। भाद्रपद मास भगवान विष्णु को समर्पित है। ऐसे में इस माह में प्रदोष व्रत करने से भोलेनाथ के साथ-साथ भगवान विष्णु का आशीर्वाद प्राप्त होता है। वहीं बुध प्रदोष व्रत में भगवान शंकर के साथ बुद्धि एवं शुभता के देवता भगवान गणेश जी की पूजा करना भी बेहद शुभ माना जाता है।

ज्योतिष- शास्त्र के अनुसार, बुधवार के दिन प्रदोष व्रत करने से व्यक्ति की हर कामना की सिद्ध होती है। प्रदोष व्रत व्यक्ति को निर्जला रखना चाहिए। शिव जी की विधिवत पूजा करने से व्यक्ति को पुण्य प्राप्त होता है। व्यक्ति सभी दोषों से मुक्त हो जाता है और मृत्यु के बाद उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है। पुराणों में कहा गया है कि दो गाय के दान के बराबर का पुण्य एक प्रदोष व्रत करने से मिलता है।