भारत का ‘उडुपी कृष्णा मंदिर’, जहां भक्त फर्श पर खाते है प्रसाद, जानें इससे जुड़ी रोचक बातें

Loading

नवभारत डिजिटल डेस्क: भारत में लगभग 20 लाख से ज्यादा मंदिर है। विविधताओं से भरे इस देश में अध्यात्म को विशेष महत्व दिया जाता है। यहां ऐसे कई धार्मिकताओं से जुड़ी चींजें हैं, जिनके बारे में जानना बेहद रोचक है। यहां मंदिरो से जुड़ी कुछ ऐसी चमत्कारिक घटनाएं होती है जिसके बारे में जानकर आप भी चौंक जाएंगे। भारत में जितने विशेष मंदिर होते है उनकी मान्यताएं भी उतनी ही अनोखी होती है। आज हम आपको भारत के एक ऐसे ही मंदिर के बारे में बताने जा रहे है, जिसके बारे में शायद आपको जानकारी न हों।

अनोखा उडुपी कृष्ण मंदिर

दरअसल आज हम जिस मंदिर की बात कर रहे है वह कर्नाटक में स्थित है। इस अद्भुत मंदिर का नाम ‘उडुपी कृष्ण मंदिर’ है। यहां एक ऐसी प्रथा है जिसके बारे में जानकर आप भी दंग रह जाएंगे। जी हां इस अनोखे उडुपी कृष्ण मंदिर में भक्त फर्श पर खाना खाते है। दरसअल यहां कुछ भक्त ऐसे होते है जो थाली में खाना न खाते हुए मंदिर के फर्श पर परोसा खाना खाते है। यह प्रथा यहां सालों से चलती आ रही है। आइए जानते है इस प्रथा के बारे में… 

भक्त फर्श पर खाते है खाना 

फर्श पर खाना खाने को लेकर इस मंदिर में एक मान्यता है। इस बारे में कहा जाता है कि जिस किसी भी भक्त की मन्नत पूरी हो जाती है तो वह भगवान कृष्ण का आभार मानने के लिए उनके प्रति समर्पण की भावना दर्शाने के लिए इस मंदिर की फर्श पर परोसा खाना खाते है। जैसा की हमने आपको बताया कि उडुपी कृष्ण मंदिर में यह प्रथा है।

अपनी इच्छा से करते है ऐसा.. 

हालांकि, इस प्रथा के बारे में यह भी कहा जाता है कि यह पूरी तरह से स्वैच्छिक है यानी भक्त के इच्छा पर निभर्र है, इस प्रथा को लेकर यहां किसी भी भक्त को जबरदस्ती नहीं की जाती यह पूरी तरह स्वेच्छा से की जाने वाली प्रथा है।  जानकारी के लिए आपको यह भी बता दें कि केवल वे ही लोग इस मान्यता का पालन करते है जिनकी कोई मन्नत पूरी हो जाती है या जिन्हें भगवान से मन्नत मांगना होता है और इस प्रथा को यहां तपस्या के रूप में लेते हैं। 

बाकी लोगों को मिलती है थाली 

जो भी इस प्रथा का पालन करना चाहता है वे भक्त भोजन परोसने वाले से अनुरोध करते हैं कि उन्हें एक प्लेट/केले का पत्ता न दिया जाए,बल्कि उन्हें फर्श पर ही परोसा जाए फिर उसी तरह भोजन परोसने वाले उस भक्त को जमीन पर ही खाना परोसते है और बाकी सभी लोगों को थाली दी जाती है। 

मंदिर में 700 वर्षों से जल रहा दिया 

मिली जानकारी के मुताबिक, कर्नाटक के उडुपी गांव में स्थित इस मंदिर में भगवान कृष्ण के मूर्ति के सामने तकरीबन पिछले 700 वर्षों से एक दीपक जल रहा है। जी हां और इतना ही नहीं बल्कि इस मंदिर की प्रमुख बात यह है कि श्री कृष्ण की पूजा यहां नौ छिद्र वाली खिड़की के माध्यम से की जाती है। इस बारे में ऐसा कहा जाता है कि यहां पर स्थित नौ छिद्र वाला खिड़की नौवों ग्रहो से जुड़ा हुआ है। इस मंदिर को लेकर यह भी मान्यता है कि इस खिड़की के माध्यम से श्री कृष्ण की पूजा करने के बाद लोग संतोष और खुशी प्राप्त करते हैं उनके जीवन में खुशहाली आती है। 

मान्यता से जुड़ा वीडियो देखने के लिए यहां क्लिक करें। 

इस अनोखे मान्यता वाले उडुपी कृष्ण मंदिर और यहां मौजूद मठ की स्थापना माधवाचार्य जी ने तेरहवीं शताब्दी के दौरान की थी। इस मंदिर से जुड़ा एक रोचक इतिहास भी है। आइए इसके बारे में जानते है… 

दीवार की ओर कृष्ण का मुहं 

आपको बता दें कि कर्नाटक राज्य के इस उडुपी गांव के कृष्ण मंदिर से जुड़ी एक कहानी है। इस कहानी में बताया जाता है कि भगवान श्री कृष्ण का  एक परम भक्त हुआ करता था। इस भक्त को इस मंदिर में जाने की अनुमति नहीं दी जाती थी। तब वह इस मंदिर के पीछे जाकर भगवान श्री कृष्ण के घोर तपस्या और प्रार्थना करने लगा तभी श्री कृष्ण ने उस भक्त को अपना दर्शन दिया और इतना ही नहीं बल्कि इस मंदिर में स्थापित प्रतिमा के सिरको उस तरफ घुमा दिया जिस तरफ उनका प्रिय भक्त बैठकर उनकी तपस्या कर रहा था। तभी से आज तक इस मंदिर में स्थापित प्रतिमा की सिर दीवार की तरफ है और इनकी दर्शन के लिए एक खिड़की बनी हुई है। इसी खिड़की के यहां भगवान श्री कृष्ण का दर्शन किया जाता है।