यहां हर घर में है नि:शुल्क लाइब्रेरी

  • पुस्तक प्रेमियों का स्वर्ग है भिलार

पुणे. लॉकडाउन से आप ऊब चुके हैं और पर्यटन पर जाने की सोच रहे हैं, तो पुणे से सिर्फ 100 किमी दूर सातारा जिले (Satara district) का भिलार गांव (Bhilar Village) आपके लिए अच्छा विकल्प हो सकता है. सातारा का भिलार गांव, जिसे इसे किताबों का गांव (Village of books) कहा जाता है, पुस्तक प्रेमियों के लिए किसी स्वर्ग से कम नहीं है.

महाराष्ट्र सरकार और मराठी विकास संस्थान की ओर से यहां गांव के 35 घरों में लाइब्रेरी सेवा (Library service in 35 homes) शुरू की गई है. यहां घरों में या फिर लॉन में झूलते हुए भी आप किताबें पढ़ने का आनंद ले सकते हैं.

पूरी तरह नि:शुल्क सेवा 

पाठकों के लिए यह सेवा पूरी तरह नि:शुल्क है, बशर्ते आप कोरोना वायरस से बचने के सभी एहतियात बरतें. यहां विभिन्न विषय से संबंधित करीब 50 हजार किताबें मुहैया कराई गई हैं. प्राकृतिक सौंदर्य से भरे इस गांव में रोज 80 लोग आ रहे हैं, जबकि छुट्टियों में यह संख्या बढ़कर 150 तक पहुंच जाती है. गांव में 22 घरों ने न्यूनतम शुल्क के साथ बाहर से आने वाले पर्यटकों के लिए लॉजिंग की सुविधा भी देनी शुरू कर दी है. अगर आप चाय-नाश्ते के साथ पुस्तकों को पढ़ना चाहते हैं, तो यह सुविधा भी यहां मौजूद है.

2015 में देवेन्द्र फडणवीस ने की थी शुरुआत

ऑनलाइन पुस्तकों की भी सुविधा यहां दी जा रही है. भिलार गांव महाबलेश्वर हिल स्टेशन के पास सुंदर पंचगनी पहाड़ी क्षेत्र में स्थित है. इस गांव के आसपास स्ट्रॉबेरी की खेती की जाती है. साल 2015 में तत्कालीन मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इसकी शुरुआत की थी. अनलॉक में अब सोशल डिस्टेंसिंग, मास्क और कोरोना से बचाव के तमाम नियमों का पालन करने वालों को गांव में आने की अनुमति दी गई है. यहां लोगों ने घरों में आराम कुर्सी, झूले आदि भी लगवा लिए हैं, ताकि पुस्तक प्रेमी इसका भरपूर आनंद ले सकें. राज्य मराठी विकास संस्थान के डायरेक्टर संजय पाटिल ने बताया कि कोरोना संक्रमण बढ़ने के बाद यहां लाइब्रेरी सेवा बंद कर दी गई थी, लेकिन अब इसे फिर शुरू कर दिया गया है, ताकि पुस्तक प्रेमी पर्यटन का भी आनंद ले सकें.