CM पद खोने के बाद त्रिवेंद्रसिंह मानते हैं खुद को अभिमन्यु

    पड़ोसी ने हमसे कहा, ‘‘निशानेबाज, (Nishanebaaz)उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्रसिंह रावत (Trivendra Singh Rawat) ने होली (Holi 2021) मिलन समारोह में इशारों-इशारों में अपने दिल का दर्द जाहिर किया.’’ हमने कहा, ‘‘दर्द तो होगा ही क्योंकि कार्यकाल पूरा होने के पहले ही उनकी कुर्सी छीन ली गई. अच्छा हुआ जो उन्होंने मन ही मन घुटते रहने की बजाय अपनी व्यथा जाहिर की. उन्होंने यह नहीं कहा- सुनाऊं क्या मैं गम अपना, जुबां पर ला नहीं सकता.’’ पड़ोसी ने कहा, ‘‘निशानेबाज, त्रिवेंद्रसिंह को हटाकर तीरथसिंह रावत को प्रदेश का नया मुख्यमंत्री बना दिया गया. स्वयं पर हुए अन्याय का संकेत देते हुए पूर्व मुख्यमंत्री ने महाभारत युद्ध के एक प्रसंग का जिक्र किया.

    उन्होंने कहा कि अभिमन्यु (Abhimanyu) की मौत पर द्रौपदी ने शोक नहीं किया क्योंकि कौरवों ने अभिमन्यु को छल से मारा था. द्रौपदी ने हाथ उठाकर पांडवों से कहा कि इसका प्रतिकार करो और कौरवों को जवाब दो.’’ हमने कहा, ‘‘अभिमन्यु को चक्रव्यूह में 7 महारथियों ने घेरकर मारा था. त्रिवेंद्रसिंह रावत ने यह नहीं बताया कि पार्टी के किन महारथियों ने उनके सीएम पद को निशाना बनाया था और किसने उनके साथ छल किया?’’ पड़ोसी ने कहा, ‘‘निशानेबाज, नाम लेकर भी क्या फायदा! पार्टी में कभी भी पासा पलट जाता है. त्रिवेंद्रसिंह ने बताया कि 4 साल तक उन्होंने सिर्फ प्रदेश के विकास पर जोर दिया. शायद कुछ व्यक्तियों को इससे कष्ट हुआ होगा. उनकी योजनाएं महिलाएं और युवाओं को मजबूत करने के लिए थीं.’’ हमने कहा, ‘‘त्रिवेंद्रसिंह को किसी दूसरे की बजाय खुद को मजबूत करना चाहिए था. नेता खुद को संभाल नहीं पाए तो मुट्ठी में भरी रेत के समान सत्ता हाथ से फिसल जाती है. वे खुद को राजनीति के चक्रव्यूह का अभिमन्यु मान रहे हैं तो उनकी मर्जी! जब सकुशल बाहर निकलने की कला मालूम न हो तो चक्रव्यूह में घुसना ही नहीं चाहिए.’’