पेट्रोल-डीजल के दाम घटे विधानसभा चुनावों का असर

    पड़ोसी ने हमसे कहा, ‘‘निशानेबाज, (Nishanebaaz) संसद सत्र सिर्फ 14 दिन चला और पेट्रोल-डीजल दामों (Petrol and Diesel Prices) में निरंतर भारी बढ़ोतरी के बाद पिछले कुछ दिनों से मूल्यवृद्धि रोक दी गई थी. इसके बाद गुरुवार को पेट्रोल प्रति लीटर 21 पैसे और डीजल 20 पैसे सस्ता किया गया. क्या यह गुरुकृपा मानी जाए?’’ हमने कहा, ‘‘न तो यह गुरुकृपा है, न सरकार की कृपा है. अनाप-शनाप तरीके से दाम बढ़ाने के बाद सिर्फ कुछ पैसों की राहत देकर सरकार ने कौन सा अहसान किया है? 5 राज्यों का विधानसभा चुनाव (Assembly Elections) सामने है इसलिए पेट्रोल-डीजल महंगा होने से नाराज जनता को सरकार मनाना चाहती है.

    6 महीने में पहली बार दाम में कटौती की गई. दर स्थिर रखने की मांग के बावजूद सरकार ने गत वर्ष मार्च में एक्साइज ड्यूटी बढ़ा दी इसके बाद से पेट्रोल की दर में 21.58 रुपए और डीजल की दर में 19-18 रुपए की वृद्धि हुई थी. ब्रांडेड पेट्रोल 100 रुपए की दर को पार कर गया था.’’  पड़ोसी ने कहा, ‘‘निशानेबाज आइल मार्केटिंग कंपनियों ने 24 दिनों तक पेट्रोल-डीजल मूल्यों को स्थिर रखा. इस दौरान क्रूड या कच्चे तेल की कीमतों में काफी उतार-चढ़ाव देखा गया. क्रूड के दाम बढ़ने पर भी चुनाव को देखते हुए पेट्रोल-डीजल के दाम इसलिए घटाए गए क्योंकि बंगाल, तमिलनाडु, केरल और असम के चुनाव में इंधन मूल्य वृद्धि चुनावी मुद्दा बन गया था.

    नाराज तो गृहिणियां भी हैं क्योंकि रसोई गैस के दाम में 100 रुपए से भी ज्यादा की वृद्धि की जा चुकी है. सब्सिडी भी मिलना बंद हो गया है.’’ हमने कहा, ‘‘जहां तक कच्चे तेल की बात है उसके दाम गत वर्ष अक्टूबर में 40 डालर प्रति बेरल थे जो कि इस वर्ष मार्च की शुरुआत में बढ़कर 70 डालर प्रति बेरल हो गए.  जब क्रूड के दाम कम थे तब भी सरकार ने जनता को पेट्रोल-डीजल कीमतों में राहत नहीं दी.’’ पड़ोसी ने कहा, ‘‘निशानेबाज, हालांकि पेट्रोलियम मंत्री ने कहा था कि पेट्रोल-डीजल के दाम कंपनियां तय करती हैं जिन पर सरकार का कोई नियंत्रण नहीं है लेकिन अभी कीमतों में मामूली राहत देना यह बताता है कि सरकार इशारा होते ही दाम घटा दिए जाते है्. एक्साइज ड्यूटी से सरकार भरपूर कमाई करती है और पेट्रोल-डीजल की जीएसटी में लाने के लिए तैयार नहीं है.