आज है ‘वैशाख अमावस्या’, जानें क्या है इसकी महिमा, पूजा विधि और शुभ मुहूर्त

    -सीमा कुमारी 

    सनातन हिंदू धर्म में ‘वैशाख अमावस्या’ का बड़ा महत्व होता है। हिन्दू पंचांग के अनुसार, ‘वैशाख अमावस्या, साल आज यानी 11 मई, मंगलवार को है। मान्यताओं के अनुसार, ‘वैशाख अमावस्या’ को धर्म-कर्म, स्नान-दान और पितरों के तर्पण के लिए बहुत ही शुभ माना जाता है। इस दिन काल सर्प दोष से मुक्ति पाने के ज्योतिषीय उपाय भी किए जाते हैं। प्रत्येक महीने अमावस्या तिथि कृष्ण पक्ष की अंतिम तिथि होती है। शास्त्रों में वैशाख अमावस्या को पितरों को मोक्ष दिलाने तिथि बताया गया है। आइए जानें ‘वैशाख अमावस्या’ का शुभ मुहर्त, व्रत विधि और महत्व:

    शुभ मुहर्त:

    ‘वैशाख अमावस्या’ 11 मई, 2021, दिन मंगलवार को है। अमावस्या तिथि 11 मई से शुरू होकर 12 मई को सुबह 12 बजकर 29 मिनट रहेगी। इस दिन सौभाग्य और  शोभन योग बन रहे हैं। 

    पूजा विधि:

    • इस दिन नदी, जलाशय या कुंड आदि में स्नान करें और सूर्य देव को अर्घ्य देकर बहते हुए जल में तिल प्रवाहित करें। पितरों की आत्मा की शांति के लिए तर्पण एवं उपवास करें और किसी गरीब व्यक्ति को दान-दक्षिणा दें।
    • ‘वैशाख अमावस्या’ पर ‘शनि जयंती’ भी मनाई जाती है। इसलिए इस दिन शनि देव को तिल, तेल और पुष्प आदि चढ़ाकर पूजन करनी चाहिए। इस दिन पीपल के पेड़ पर सुबह जल भी चढ़ाना चाहिए और संध्या के समय दीपक भी जलाना चाहिए।
    • गरीब और जरूरत मंद व्यक्ति या ब्राह्मण को भोजन और यथाशक्ति वस्त्र और अन्न का दान भी करना चाहिए।

    महत्व:

    धार्मिक शास्त्रों में इस दिन का काफी महत्व है। इस दिन कई शुभ अनुष्ठान किए जाते हैं। अमावस्या तिथि पर कई लोग अपने पितरों को प्रसन्न करने के लिए श्राद्ध कर्म करते हैं। इस दिन पितृ तर्पण, नदी स्नान और दान-पुण्य आदि करना ज्यादा फलदायी माना जाता है। इतना ही नहीं यह तिथि पितृ दोष से मुक्ति दिलाने में सहायक मानी गई है। अत: पितृ कर्म के लिए यह तिथि बेहद शुभ मानी जाती है। कहा जाता है कि इस शुभ योग में की जाने वाली यात्रा मंगलमय एवं सुखद रहती है। यात्रा के दौरान किसी भी तरह की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ता है। 

    क्या करें और क्या नहीं?

    ‘वैशाख अमावस्या’ के दिन सुबह उठकर स्नान करना शुभ माना गया है। इस दिन पीपल के वृक्ष की पूजा होती है। घर के पितरों का तर्पण करना चाहिए और शुद्ध सात्विक भोजन बनाकर उन्हें भोग लगाना चाहिए। कहते हैं कि ऐसा करने पितर तृप्त होते हैं और आशीर्वाद देते हैं। अमावस्या के दिन अपनी सामर्थ्य के हिसाब से दान जरूर देना चाहिए। शास्त्रों के मुताबिक,इस दिन वाद-विवाद से बचना चाहिए। इस दिन झूठ नहीं बोलना चाहिए। मांस-मदिरा का सेवन बिल्कुल भी नहीं करना चाहिए।