सिर्फ मंदिरों पर ही सरकारी नियंत्रण, मस्जिद, चर्च, गुरुद्वारे स्वतंत्र

    यह कैसा न्याय है कि केवल मंदिरों पर सरकारी नियंत्रण बना हुआ है जबकि मस्जिद, चर्च व गुरुद्वारे पूरी तरह स्वतंत्र हैं. उन पर कहीं कोई बंदिश नहीं है. धर्मादास के तहत मंदिरों की संपत्ति, चढ़ावे पर सरकार की निगाह रहती है. कुछ वर्ष पूर्व पद्मनाथ स्वामी मंदिर के चेम्बर खुलवाए गए थे. जिन प्रसिद्ध मंदिरों में भक्तों की अधिक भीड़ लगी रहती है वहां सरकार का और अधिक दबाव बना रहता है. 

    क्या धर्मिरपेक्षता के नाम पर विगत दशकों में अन्य धर्मों के उपासना स्थलों में कोई हस्तक्षेप न करते हुए सिर्फ मंदिरों पर ही दबाव बनाया गया? यह तो समान न्याय के सिद्धांत का उल्लंघन है. यदि ऐसी शंका की जाती है कि मंदिरों के प्रबंधन और हिसाब किताब पर निगाह रखने की जरूरत है तो यही अन्य धर्मों के उपासना स्थलों पर क्यों लागू नहीं होती?

    तमिलनाडु में डीएमके की सरकार है. रामास्वामी पेरिकार के जनजागृति आंदोलनों की वजह से स्थापित डीएमके शुरु से ही अनास्थावादी या नास्तिक पार्टी मानी जाती है. इस राज्य की एमके स्टालिन के नेतृत्व वाली सरकार तमिलनाडु के मंदिरों का लगभग 2,138 किलो सोना पिघलाने की तैयारी में है. 

    इस कदम के खिलाफ एवी गोपाला कृष्णन और एमके सर्वानन ने मद्रास हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करते हुए राज्य सरकार के आदेश को चुनौती दी है.  यचिकाकर्ताओं का दावा है कि सरकार का यह आदेश सिर्फ हिंदू रिलीजियस एंड चैरिटेबल एंडोवमेंट्स एक्ट, एन्शिएंट मॉन्युमेंट्स एक्ट और ज्वेल रूल्स आदि का ही उल्लंघन नहीं करता बल्कि हाईकोर्ट के आदेश के भी खिलाफ है.

    हड़बड़ी वाला कदम

    याचिकाकर्ताओं ने स्टालिन सरकार के आदेश को अवैध बताते हुए कहा कि मंदिर में श्रद्धालुओं की ओर से चढ़ाए गए सोने का सही तरह से आडिट किए बिना ही हड़बड़ी में सरकार इस तरह का कदम उठा रही है. इससे सरकार की मंशा या इरादों पर सवाल खड़े हो जाते हैं. हिंदू संगठनों का कहना है कि बिना आडिट गहनों को पिघलाने के पीछे सरकार का फैसला संदेह को जन्म देता है. यह कदम एक पक्षीय तरीके से उठाने का किसी को हक नहीं है.

    सरकार की दलील

    डीएमके सरकार का दावा है कि उसे मंदिरों में जमा स्वर्ण को गलाकर गोल्डवार (सोने की छड़ों) में बदलने का अधिकार है. यह कोई नई प्रक्रिया या कदम नहीं है. पिछले 50 वर्षों से ऐसा होता आ रहा है. हाल ही में राज्य सरकार ने कहा था कि वह देवताओं के श्रृंगार ने आने वाले बड़े आभूषणों के अलावा सोने के बाकी गहनों और अन्य वस्तुओं को पिघलाएगी. उसने इसका वजन भी 2,138 किलो घोषित कर दिया है. 24 कैरेट सोने के बार बैंकों में रखकर जो पैसे मिलेंगे, उनका इस्तेमाल मंदिरों के विकास के लिए किया जाएगा.

    विहिप का महाभियान

    हिंदू मंदिरों का संचालन हिंदू भक्तों के हाथों में दिए जाने के आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के बयान के बाद विश्व हिंदू परिषद देश भर के मंदिरों को सरकारी नियंत्रण से मुक्त करने के लिए महाभियान शुरु कर रही है. इस उद्देश्य से वकीलों और संविधान विशेषज्ञों की विशेष टीम भी बनाई गई है जो कानूनी पहलुओं पर विचार कर सहयोग देगी. इस महाभियान में आम देशवासियों के अलावा, धार्मिक, सामाजिक, राजनीतिक व कानूनी क्षेत्र के दिग्गजों से विचार-विमर्श कर उपयुक्त कदम उठाए जाएंगे.