Bullet train
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विकास तभी संभव है जब केंद्र को राज्यों का सहयोग मिले. बीजेपी (BJP) अपने शासित राज्यों में केंद्र सरकार के तमाम फैसले आसानी से लागू कर लेती है लेकिन बाकी राज्यों में कोई न कोई व्यवधान आ ही जाता है. रेल मंत्रालय (Railway Board) ने साफ कह दिया है कि यदि महाराष्ट्र सरकार ने अपने राज्य में भूमि अधिग्रहण में मदद नहीं की तो बुलेट ट्रेन दूसरे फेज में नहीं चलेगी. पहले फेज या प्रथम चरण में बुलेट ट्रेन (Bullet Train)अहमदाबाद से वापी के बीच 325 किलोमीटर ट्रैक पर दौड़ाई जा सकती है. यदि भूमि अधिग्रहण की मंजूरी मिली तो ही दूसरे फेज में वापी से बांद्रा तक बुलेट ट्रेन (Railway Board) चलेगी.

महाराष्ट्र सरकार (Maharashtra Government) ने 4 महीने में भूमि अधिग्रहण करने का विश्वास दिलाया है. अब तक महाराष्ट्र में बुलेट ट्रेन परियोजना के लिए 432 हेक्टेयर भूमि में से सिर्फ 97 हेक्टेयर का ही अधिग्रहण हो सका है. इस प्रोजेक्ट के लिए लगने वाली जमीन का यह केवल 22 प्रतिशत हिस्सा है. दादरा और नगर हवेली में 8 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहण का काम तेजी से हुआ है. वहां 956 हेक्टेयर में से 825 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण कर लिया गया है. इस तरह गुजरात में लगभग 90 फीसदी जमीन का अधिग्रहण हो जाने से वहां टेंडर जारी कर ग्राउंड वर्क शुरू किया जा रहा है. महाराष्ट्र में किसान अपनी उपजाऊ जमीन देने का विरोध कर रहे हैं तो कहीं ऐसा भी हो रहा है कि उसके लिए ज्यादा मुआवजा मांगा जा रहा है. बुलेट ट्रेन की व्यावहारिकता को लेकर भी संदेह बना हुआ है.

कुछ लोग मानते हैं कि जब बुलेट ट्रेन और हवाई जहाज का किराया लगभग बराबर होगा तो फ्लाइट से जाना क्या बुरा है! कुछ आलोचकों का सवाल यह भी है कि क्या बुलेट ट्रेन के लिए पर्याप्त यात्री मिलेंगे? तेजस जैसी प्राइवेट लग्जरी ट्रेन भी यात्रियों की कमी से जूझ रही है तथा इसी वजह से उसकी सेवाओं पर असर पड़ा है. ऐसी हालत में बुलेट ट्रेन की महत्वाकांक्षी योजना कितनी सफल हो पाएगी? कुछ लोग इसका अनुभव लेने के लिए एकाध बार बुलेट ट्रेन में प्रवास कर लेंगे लेकिन हमेशा के लिए इसे नहीं अपनाएंगे. जब सेमी हाई स्पीड ट्रेनें चल रही हैं तो बुलेट ट्रेन की कितनी स्वीकार्यता होगी? वैसे रेलवे बोर्ड ने चेतावनी दे दी है कि जहां विरोध होगा, वहां बुलेट ट्रेन नहीं दी जाएगी.