आस्था की पराकाष्ठा, धनखड़ ने मोदी की गांधी से की तुलना

Loading

जब प्रेम और विश्वास आपस में दूध-पानी की तरह मिल जाते हैं तो आस्था उत्पन्न होती है. आस्था घनीभूत होती है तो उसके सामने बड़ा से बड़ा तर्क भी नहीं चलता. उपराष्ट्रपति जगदीश धनखड़ (Vice President Jagdish Dhankhar) को ऐसी दिव्य अनुभूति हुई कि उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) की सीधे महात्मा गांधी से तुलना कर दी. धनखड़ ने कहा कि महात्मा गांधी बीते युग के महापुरुष थे जबकि पीएम मोदी इस युग की बड़ी हस्ती हैं. गांधी महापुरुष थे तो मोदी इस सदी के युगपुरुष हैं. महात्मा गांधी ने सत्याग्रह और अहिंसा के माध्यम से हमें अंग्रेजों की गुलामी से मुक्त कराया. भारत के सफल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हमें उस रास्ते पर ले गए जहां हम हमेशा जाना चाहते थे.

उपराष्ट्रपति ने यह भी कहा कि दार्शनिक व आध्यात्मिक हस्ती श्रीमद राजचंद्र की महानता ऐसी थी कि उन्होंने महात्मा गांधी और मोदी दोनों को प्रेरित किया. धनखड़ पेशे से वकील रहे हैं इसलिए अपनी दलील से उन्होंने महात्मा और मोदी को बराबरी पर तौल दिया. उन्होंने देशवासियों की आंखें खोल दी है कि मोदी की महानता को पहचानो. नेहरू से मनमोहन सिंह तक सारे प्रधानमंत्री एक तरफ रख दो, अकेले मोदी सब पर भारी हैं. नेहरू और सरदार पटेल दोनों ही महात्मा गांधी के शिष्य थे.

मोदी और गांधी दोनों ने श्रीमद् राजचंद्र से प्रेरणा ली, इस लिहाज से दोनों गुरुभाई माने जा सकते हैं. ऐसे ही एक समय वेंकैया नायडू ने अटल बिहारी वाजपेयी को ‘विकास पुरुष’ और लालकृष्ण आडवाणी को ‘लौह पुरुष’ कहा था. बाद में आडवाणी लौह पुरुष की बजाय ‘मोम पुरुष’ बनकर रह गए. मौलिक सोच रखनेवाले नेता ऊंचे पद हासिल करते हैं.

वेंकैया और धनखड़ ऐसी ही ‘आउट आफ दि बॉक्स’ सोच रखते हैं. इसीलिए दोनों ने उपराष्ट्रपति पद हासिल किया. भीमसेन जोशी का भजन है- जो हरि को बजे वो परम पद पाएगा! वेंकैया और धनखड़ ने ‘नमो’ को भजकर इच्छित पद पाया. सिर्फ एक खेमे की श्रद्धा की बात क्यों करें. कांग्रेस में भी तो यही हुआ था. कांग्रेस अध्यक्ष रहते हुए देवकांत बरुआ ने कहा था- ‘इंडिया इज इंदिरा एंड इंदिरा इज इंडिया!’ प्रशंसा और चाटुकारिता में बहुत बारीक अंतर रहता है.