मंदिर के पट खोलने से क्या काम अभी भगवान कर रहे क्षीरसागर में विश्राम

पड़ोसी ने हमसे कहा, ‘‘निशानेबाज, ईश्वरीय संकेतों को लेकर आपकी क्या राय है? क्या प्रभु अपने भक्तों को स्वप्न में कोई निर्देश देते हैं? यह विषय आस्था और अध्यात्म से जुड़ा है इसलिए पूछ रहे हैं.’’ हमने कहा, ‘‘यही प्रश्न राज्यपाल भगतसिंह कोश्यारी (Bhagat Singh Koshyari) ने मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे(Chief Minister Uddhav Thackeray)से पूछा था कि क्या उन्हें मंदिरों को बंद रखने का कोई ईश्वरीय संकेत मिला है? हम समझते हैं कि इसका जवाब ‘हां’ या ‘नहीं’ में हो सकता है. वैसे देश में कितने ही लोग ऐसे हैं जो स्वप्न में गड़ा धन या सट्टे का नंबर देखते हैं और इसे ईश्वरीय संकेत बताते हैं. जहां तक अध्यात्म की बात है, जैसी जिसकी भावना है, उसे वैसा स्वप्न दिखाई देता है. बुधकौशिक मुनि को भगवान शंकर ने स्वप्न में रामरक्षा स्तोत्र सुनाया था जिसे प्रात:काल जागने पर मुनि ने लिख लिया.

अनेक लोग श्रद्धापूर्वक इसी रामरक्षा का पाठ करते हैं. उद्धव ठाकरे ही बता सकते हैं कि क्या उन्होंने स्वप्न में छत्रपति शिवाजी महाराज को देखा या मुंबादेवी ने उन्हें दर्शन दिए? आस्थावान सिद्ध पुरुषों को ऐसा साक्षात्कार होता रहता है. छत्रपति शिवाजी महाराज को माता तुलजा भवानी ने दुष्टों का संहार करने के लिए भवानी तलवार दी थी. कहते हैं कि यह तलवार लंदन के म्यूजियम में रखी है. पूर्व मुख्यमंत्री एआर अंतुले ने एक बार कहा था कि वे लंदन जाकर इस तलवार को वापस लाएंगे, फिर पता नहीं क्या हुआ!’’ पड़ोसी ने कहा, ‘‘निशानेबाज, पूर्व मुख्यमंत्री अंतुले की बात छोड़िए, वर्तमान मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के बारे में बताइए कि क्या उन्हें मंदिरों के पट बंद रखने का संकेत मिला है?’’ हमने कहा, ‘‘मंदिरों की साफ सफाई और पट खोलने व बंद करने का काम पुजारी का है. वह अपरान्ह आरती के बाद पट बंद करता है तो शाम को खोलता है. फिर रात में पट बंद कर देता है. भगवान को भोग लगाने के समय भी पर्दा खींच दिया जाता है. संत कबीरदास ने लिखा था- घूंघट के पट खोल री तोहे पिया मिलेंगे.

एक अभंग है- उघड़ दार देवा आता, उघड़ दार देवा. इसका आशय है कि भगवान अब अपना दरवाजा खोलो. मोहम्मद रफी ने भी बैजू बावरा फिल्म में गाया था- तुम्हरे द्वार का मैं हूं जोगी, हमरी ओर नजर कब होगी.’’ पड़ोसी ने कहा, ‘‘निशानेबाज, तरह-तरह की बातें करके हमें बहलाने की कोशिश मत कीजिए. सिर्फ इतना बताइए कि मंदिर कब खुलेंगे?’’ हमने कहा, ‘‘इसका जवाब यह है कि देवशयनी एकादशी के बाद से भगवान क्षीरसागर में शेषशय्या पर सोए हुए हैं. चातुर्मास पूरा हो जाने के बाद भगवान कार्तिक मास की देवउठनी एकादशी को अपनी योगनिद्रा से जाग जाएंगे. फिर तुलसी विवाह मनाया जाएगा और शुभ कार्य शुरू हो जाएंगे. जब तक भगवान सोए हुए हैं, तब तक पट बंद ही रहेगा. इसलिए अभी प्रतीक्षा करो. डू नॉट डिस्टर्ब!’’