All rebel MLAs of Congress join BJP

नई दिल्ली: मध्यप्रदेश कांग्रेस के सभी बागी विधायक शनिवार को भाजपा में शामिल हो गए. भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जे पी नड्डा के आवास पर हुई मुलाकात में सभी बागीयों को पार्टी में शामिल किया गया. इस दौरन ज्योतिरादित्य सिंधिया, भाजपा नेता नरोत्तम मिश्रा, केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर, कैलाश विजयवर्गीय सहित कई नेता उपस्तिथ थे. 

गौरतलब है कि राज्यसभा सीट नहीं मिलने से नाराज चल रहे ज्योतिरादित्य सिंधिया कांग्रेस से इस्तीफ़ा देकर भाजपा में शामिल हो गए थे. जिसके समर्थन में कांग्रेस के 22 विधायकों ने अपने पद से इस्तीफ़ा दे दिया था. सभी बागी विधायक बंगलुरु के एक होटल में रुके हुए थे जहां से सभी ने अपने इस्तीफे विधानसभा अध्यक्ष और राज्यपाल को भेजे. जिसके कारण मध्यप्रदेश की कमलनाथ सरकार अल्पमत में आ गई थी. इन विधायकों में छह मंत्री भी शामिल थे.

सभी को सम्मान का किया वादा 
भाजप नेता सिंधिया ने कहा, ” सभी 22 बागी विधायक भाजपा में शामिल होचुके हैं. राष्ट्रीय अध्यक्ष नड्डा जी ने सभी के सम्मान देने का वादा किया हैं. इसी के साथ सभी को उपचुनाव में मौके दिए जाने का वादा भी किया हैं.”

बहुमत साबित करने से पहले दिया इस्तीफ़ा
पिछले दो हफ्तों से शुरू राजनीतिक उठापठक शुक्रवार को रुक गई. मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ ने विधानसभा में बहुमत साबित करने से पहले ही अपने पद से इस्तीफ़ा दे दिया. इस दौरान उन्होंने पत्रकारों को संबोधित करते हुए भाजपा पर विधायकों को बंदी बनाने का आरोप लगाया. इसी के साथ उन्होंने सिंधिया पर हमला करते हुए कहा, ” एक महाराजा और 22 लालाची लोगों के वजह से उनकी सरकार गिर गई.”

सुप्रीम कोर्ट ने शाम तक बहुमत साबित करने का दिया निर्देश
इसके पहले विधानसभा अध्यक्ष नर्मंदा प्रसाद प्रजापती ने 16 मार्च को कोरोना वायरस को मुद्दा बनाते हुए विधानसभा की कार्यवाही 26 मार्च तक स्थगित कर दी थी, जिसके विरोध में पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा नेता शिवराज सिंह चौहान ने मुख्यमंत्री कमलनाथ और विधानसभा अध्यक्ष के विरोध में सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई थी. उन्होंने सरकार को तुरंत बहुमत साबित करने का निर्देश देने की मांग की थी. जिसपर निर्णय देते हुए अदालत ने कलनाथ सरकार को 20 मार्च को शाम पांच बजे तक बहुमत साबित करने का निर्देश दिया था.

विधायकों को बचाने दोनों दलों ने खेली रिसॉर्ट पॉलिटिक्स
कांग्रेस के विधायकों के इस्तीफे देने के बाद, भाजपा और कांग्रेस ने अपने विधायकों को टूटने से बचाने के लिए मध्यप्रदेश के बाहर रिसॉर्ट में रखा हुआ था. भाजपा ने जहाँ अपने विधायकों को हरियाणा के मानेसर के एक रिसॉर्ट में रखा, वहीँ कांग्रेस ने अपने विधायकों को भाजपा से बचाने के लिए जयपुर, राजस्थान  के रिसॉर्ट में रखा हुआ था.