जि.प. सदस्यों का सीईओ के कक्ष में बैठा आंदोलन, 15 लाख रू. तक के कार्य ग्राम पंचायत को देने की मांग

    अकोला. 15 लाख रू. तक के कार्यों की अनुमति ग्राम पंचायतों को दी जाए इस मांग को लेकर जिला परिषद के शिवसेना सदस्यों ने आज जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी के कक्ष में बैठा आंदोलन किया. इस मांग को लेकर शिवसेना के सदस्य काफी आक्रमक हुए थे. नियोजन समिति की ओर से मिलने वाला निधि ग्रामीण क्षेत्र के रास्तों की दुरूस्ती के लिए उपयोग में लाया जाता है.

    इसी तरह, जिला परिषद सदस्यों द्वारा सुझाए गए कार्य जिला परिषद द्वारा किए जाते हैं. लेकिन गांवठान क्षेत्र के जो कार्य 15 लाख रू. के भीतर हैं ऐसे कार्य ग्राम पंचायतों को दिए जाए इस तरह का शासन निर्णय होने से तदनुसार ग्राम पंचायतों को कार्य दिए जाए यह मांग शिवसेना सदस्यों ने की है. इसके लिए शिवसेना के जिला परिषद सदस्य ने निर्माण विभाग के कार्यकारी अभियंता से मुलाकात की.

    इस पर कार्यकारी अभियंता ने मुख्य कार्यकारी अभियंता से चर्चा करने के बाद निर्णय लेने का आश्वासन दिया था. यह कार्य प्रलंबित न रहें इसके लिए ग्राम पंचायत को दिए जाएं यह मांग शिवसेना ने की है. हालांकि सीईओ ने कहा कि पुस्तिका ग्राम पंचायत को नहीं दी जानी चाहिए, जिससे जि.प. सदस्यों ने सीईओ के कक्ष में बैठा आंदोलन किया. 

    ग्रामीण क्षेत्रों की स्थिति खराब

    ग्रामीण क्षेत्रों के विभिन्न गांवों को जोड़ने वाली सड़कें प्रतीक्षारत हैं. कई बार सड़कों पर कीचड़ या मरम्मत की गई. लेकिन बाद में छह माह में ही पूर्व की तरह रास्तों की हालत हो गयी थी. इसी तरह ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूलों की भी हालत खराब है. ग्राम पंचायत कार्यालय भवन जर्जर हुआ हैं. इसलिए अकेले ग्राम पंचायत स्तर पर 15 लाख रू. तक कार्यों की अनुमति देने की मांग की गई है.

    अक्सर धन की समस्या 

    ग्राम पंचायत सदस्य और सरपंच व उप सरपंच का चुनाव ग्रामीण बड़ी उम्मीदों से करते हैं. लेकिन अक्सर सड़कों पर रोशनी नहीं होती, गंदगी फैलती है, सड़कें जर्जर हो जाती हैं, इमारत गिर जाती है, नालियां बजबजा जाती है. इसकी शिकायत के लिए नागरिक सरपंच के पास ही दौड़े जाते हैं. लेकिन निधि के अभाव में कई कार्य वर्षों से लंबित हैं. इसलिए नागरिकों के गुस्से को सरपंच, पंचायत समिति सदस्य, जिला परिषद सदस्यों को सहन करना पड़ता है. यदि सरकार विभिन्न विकास कार्यों के लिए ग्राम पंचायत स्तर पर निधि उपलब्ध कराती है तभी विकास कार्यों को गति मिलने की उम्मीद है.