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अकोला. सातवे वेतन आयोग के साथ साथ अपनी विविध प्रलंबित मांगों के लिए राज्य के महाबीज कर्मचारियों ने 9 दिसंबर से हड़ताल की शुरूआत की थी. करीब 90 प्रतिशत कर्मचारी इस हड़ताल में शामिल हैं. जिसके कारण महाबीज का कामकाज लगभग ठप्प हो गया है.

आज सोमवार 21 दिसंबर को इस कामबंद आंदोलन का 13वां दिन हैं. प्रलंबित मांगों को लेकर वरिष्ठ स्तर पर चर्चा शुरू है. लेकिन अभी तक ठोस आश्वासन न मिलने के कारण कोई हल नहीं निकल सका है. सातवा वेतन आयोग लागू किया जाए यह कर्मचारी संगठन की मुख्य मांग है.

इसी तरह सरकारी कर्मियों को लागू समय समय पर मंजूर किए जानेवाले वेतन, भत्ते व अन्य सुविधा महाबीज कर्मियों को भी लागू होनी चाहिए यह सभी मांगे मंजूर करने के लिए महाबीज आर्थिक रूप से सक्षम है. कई माह से यह मांगे प्रलंबित हैं. इसके कारण कर्मचारी संगठन द्वारा यह कामबंद आंदोलन शुरू किया गया है.

इस बारे में 4 दिसंबर को मुंबई में सेक्रेटरी के कक्ष में संगठनों को चर्चा के लिए बुलाया गया था. लेकिन चर्चा में जो तय हुआ था उस अनुसार ठोस आश्वासन न मिलने के कारण काम बंद आंदोलन शुरू है. यह जानकारी महाबीज कर्मचारी संगठन के सचिव विजय अस्वार द्वारा दी गयी है. 

सेवानिवृत्त कर्मियों का अनशन समाप्त

महाबीज सेवानिवृत्त कर्मचारी संगठनों ने विविध मांगों को लेकर 9 दिसंबर से श्रृंखलाबद्ध अनशन शुरू किया था जो कि अब पीछे ले लिया गया है. संगठन के संचालक रामराव फोटखेडे व हनुमान आगे को महाप्रबंधक प्रशासन डा.प्रफुल्ल लहाने व महाप्रबंधक (विपणन) कुचे ने नींबू पानी देकर अनशन समाप्त करवाया.

सेवानिवृत्त कर्मियों की मांगों पर सकारात्मक विचार कर के होने वाली बोर्ड मीटिंग में न्यायपूर्ण मांगे मंजूर किए जाने का आश्वासन डा.प्रफुल्ल लहाने ने दिया. इस अवसर पर सेवानिवृत्त कर्मचारी संगठन के अध्यक्ष के.जी. देशमुख, उपाध्यक्ष देशकर, सचिव राजेंद्र भातुलकर, कोषाध्यक्ष अरविंद कक्कड, संचालक रामचंद्र आव्हाड व चंद्रकांत अवचार प्रमुखता से उपस्थित थे.