Farmer dies after falling in a well
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दर्यापुर. महाराष्ट्र शासन की ओर से तहसील के ढ़हे हुए व बुझ गए कुओं को पुर्नजिवित करने के लिए गाजेबाजे के साथ योजना सुचारु की गई गई. इस योजना में किसानों को दोगुना फायदा होगा इसलिए किसानों ने भी कुएं पुर्नजिवित किए और कईयों ने कुओं का स्वखर्च से निर्माण कार्य भी किया, लेकिन किसानों को अभी तक आर्थिक लाभ नहीं मिलने से किसान अब कार्यालयों के चक्कर कांटने विवश हो रहे है. 

78 किसान ने बनाएं कुएं

दर्यापुर तहसील में 144 कुओं का समावेश किया गया. जिसमें से 78 किसानों ने स्वखर्च से कुएं बनों है. बावजूद इसके अभी तक उनके अकांउंट मं पैसे नहीं आने से उन्हें केवल प्रतिक्षा ही करनी पड़ रही है. कई वर्षों से कार्यालय में चक्कर कांटने वाले किसानों को निराशा ही मिलने से अब दुबारा शासन की किसी भी योजना का लाभ नहीं लेने की मानसिकता ही बना रहा हो ऐसा प्रतित हो रहा है. दर्यापुर तहसील असिंचिंत क्षेत्र के रुप में प्रसिध्द है.

तहसील के किसान केवल बारीश पर निर्भर रहने से कई बार किसानों को बारीश की अनियमितता के चलते काफी नुकसान उठाना पड़ा है. आर्थिक संकट के चलते कर्ज के तले किसान दब रहा है. ऐसे में बुझ गए व ढ़हे हुए कुओं को शासन स्तर पर पंचायत समिति व रोजगार गारंटी योजना के माध्यम से दुबारा जीवनदान देने के उद्देश्य से किसानों ने अपनाया लेकिन यह योजना भी उनके लिए सूखा अकाल ही साबित हुई. 

कर्ज निकालकर बनाएं कुएं 

खेत शिवार में कुएं पानी के अभाव में सूखने लगे इसलिए फसलों को सुरक्षा प्रदान करने के लिए वन टाईम इनवेस्टम वह भी रिटर्न होने से किसानों ने कर्ज निकालकर कुएं बनाने का काम शुरू किया. बारीश के मौसम और लाकड़ाऊन समाप्त होने के बाद किसानों ने इस योजना के खर्च के बिल, दस्तावेज व रोजगार सेवक व संबंधित अधिकारियों के पास जमा कराए.

अधिकारियों ने भी कुएं की दुरुस्ती हुई अथवा नहीं इसकी जानकारी लेने के लिए झिरो टैगिंग भी किया लेकिन अभी तक इस योजना की निधि किसानों को नहीं मिलने से यह योजना भी किसानों को कर्ज के दलदल में ढ़केलनी वाली साबित होगी क्या? ऐसा सवाल उठाया जा रहा है. एक वर्ष से कार्यालय में चक्कर मारने के बाद भी शासन निधि क्यों नहीं दे रहा ऐसा सवाल किसानों द्वारा पूछा जा रहा है. 

वरिष्ठों को जानकारी दी है

संबंधित किसानों का एटीओ तैयार किया है, लेकिन अभी तक इस योजना की निधि प्राप्त नहीं होने से उसे वितरित नहीं किया. हमने वरिष्ठ स्तर पर इसकी जानकारी दी है जल्द ही निधि प्राप्त होगी. – डा. योगेश देशमुख, तहसीलदार, दर्यापुर

निधि नहीं मिली

मेरे खेत में ढ़हे हुए कुएं को दुबारा तैयार किया गया. संबंधित अधिकारी ने इसका निरीक्षण भी किया. बिल व दस्तावेज भी दिए गए बावजूद इसके अभी तक पैसे नहीं मिले. कार्यालय में कई बार पूछताछ की गई लेकिन निधि नहीं आयी ऐसा ही बताया जाता है.- चंद्रकांत देशपांडे, किसान पेठ इतबारपुर