औरंगाबाद की लेबर कालोनी पर चला प्रशासन का बुलडोजर

    औरंगाबाद : शहर में पिछले कई सालों से बहुचर्चित लेबर कालोनी (Labor Colony) को खाली कराने के लिए प्रशासन (Administration) द्वारा प्रयास जारी थे। जिला प्रशासन ने काम करते हुए सालों से प्रलंबित मामले को हल करने कामयाबी हासिल करते हुए लेबर कालोनी पर बुलडोजर (Bulldozer) चला दिया। देर शाम तक प्रशासन ने लगभग सभी 338 घरों (338 Houses) पर बुलडोजर चलाते हुए उन्हें जमींदोज (Land) किया। प्रशासन द्वारा कार्रवाई (Action) के दरमियान कुछ लोगों ने मामूली भी विरोध भी किया। परंतु, कड़े बंदोबस्त (Strict Settlement) के चलते उनका यह प्रयास असफल साबित हुआ। प्रशासन द्वारा की गई इस कार्रवाई के बाद लेबर कालोनी में बड़े पैमाने पर मलबा पड़ा हुआ था। रात में यह परिसर विरान लग रहा था। 

    शहर के बीचों बीच लेबर कालोनी में सालों से लोग अपना आशियाना बसाए हुए थे। सरकारी विभागों से सेवानिवृत्त होने के बाद भी कई परिवार अपना डेरा जमाए हुए थे। 338 मकानों में से कई मकानों में अवैध परिवारों ने अपना डेरा जमाया था। लेबर कालोनी को हटाकर वहां शहर के अलग-अलग क्षेत्रों में फैले हुए सरकारी कार्यालय स्थापित करने के लिए एक भव्य इमारत का निर्माण करने का निर्णय प्रशासन ने लिया था। परंतु, लेबर कालोनी में पिछले 50 सालों से जमे हुए नागरिकों को हटाना प्रशासन के लिए टेढ़ी खीर साबित हो रहा था। हाईकोर्ट (High Court) सहित सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने जर्जर हो चुकी लेबर कालोनी को इमारतों को जमींदोज करने के आदेश देकर जिला प्रशासन के फेवर में निर्णय दिए थे। इधर, नागरिकों का विरोध बरकरार था। नागरिकों के विरोध को दरकिनार करते हुए लेबर कालोनी जमींदोज करने की कार्रवाई सुबह 5 बजे शुरु की गई जो देर शाम तक जारी थी। 

    धारा 144 लागू कर की गई कार्रवाई

    लेबर कालोनी जमींदोज करने के लिए जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन ने युद्धस्तर पर तैयारियां की थी। कार्रवाई के दरमियान किसी प्रकार की कानून सुव्यवस्था में बाधा न आए इसलिए प्रशासन ने इस परिसर में धारा 144 लागू की थी। साथ ही मुख्य रास्ते बंद किए थे। जिससे प्रशासन को कार्रवाई करने में बड़ी आसानी हुई। कार्रवाई के लिए कई आला पुलिस अधिकारियों के अलावा 500 पुलिस कर्मचारियों को तैनात किया गया था। उधर, मंगलवार की सुबह से ही लेबर कालोनी में रहने वाले नागरिक समझ चुके थे, कि अब उन्हें बचने का कोई रास्ता नहीं बचा है। इसलिए नागरिकों ने खुद से ही अपने घर खाली कर दिए थे। मंगलवार की शाम तक 200 से अधिक परिवारों ने अपना सामान खाली कर वहां से चलते बने थे। बुधवार की सुबह प्रशासन ने कार्रवाई शुरु करते ही बचे हुए नागरिकों ने विरोध शुरु किया था। लेकिन, प्रशासन और पुलिस प्रशासन के अधिकारियों ने सख्त चेतावनी देने के बाद उन लोगों ने अपने घर खाली कर दिए। सुबह 5 से शाम 5 बजे तक युद्धस्तर पर लेबर कालोनी को जमींदोज करने की कार्रवाई जारी थी। प्रशासन लंबे अरसे के बाद लेबर कालोनी जमींदोज करने में कामयाब रहा। 

    1980 से था प्रलंबित विषय : कमिश्नर पांडेय 

    महानगरपालिका कमिश्नर पांडेय (Municipal Commissioner Pandey) ने बताया कि लेबर कालोनी में बने मकानों को तोडने को लेकर प्रशासन गत 40 सालों से अधिक प्रयास कर रहा था।  नागरिकों का विरोध के बीच यह मामला हाईकोर्ट सहित सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। दोनों न्यायालयों ने प्रशासन के फेवर में निर्णय देने के बाद कार्रवाई शुरु की गई। उन्होंने बताया कि इस परिसर में रहने वाले कई नागरिकों के पास मकान नहीं है। उन्हें पीएम आवास योजना (PM Awas Yojana) के तहत प्राथमिकता से घर देने के प्रयास किए जाएंगे।