स्थानीय निकाय चुनाव ओबीसी आरक्षण के बिना ना कराए, जिलाधिश को सौपे ज्ञापन में डी के आरीकर की मांग

    चंद्रपुर. देश के विकास में ओबीसी समाज ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, लेकिन आजादी के 75 वर्ष बाद भी, 52% ओबीसी समुदाय अपने अधिकारों और अधिकारों से वंचित रहने से ओबीसीयों की जीए या मरे ऐसी अवस्था निर्माण हुवी है. किसान आत्महत्या कर रहे हैं और बेरोजगारी बढ़ रही है.

    ओबीसी के उत्थान के लिए डॉ. बाबासाहेब आम्बेडकर ने संविधान में अनुच्छेद 340 लिखकर न्याय करने की कोशिश की. ओबीसी के वोटो पर लगातार सत्ता पानेवाले सत्ताधारीयों ने ओबीसी को न्याय नही दिया. उलटा उनपर अन्याया किया है. इसलिए केंद्र सरकार ने ओबीसी की जनगनना कर स्थानीय निकायों में बिना आरक्षण के चूनाव ना ले अन्यथा कुर्सी खाली करने का इशारा राकां ओबीसी सेल के जिलाध्यक्ष डी के आरीकर ने जिलाधिश के माध्यम से प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति व पिछडे वर्ग आयोग को सौपे गए ज्ञापन में दिया है. 

    हमने ओबीसी की जनगणना के लिए राष्ट्रीय कुणबी फेडरेशन की ओर से 2001 में उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी. तब 2011 में ओबीसी की जनगणनना करने की जानकारी सरकार ने दी थी. परंतु 2011 में भी तत्कालीन केंद्र सरकार ने ओबीसी की स्वतंत्र जाति-वार जनगणना नहीं की. 2021 में ओबीसी की जनगणना नहीं हुई और केंद्र ने ओबीसी के इम्पेरिअल डाटा सुप्रिम कोर्ट को उपलब्ध नहीं कराया जिससे ओबीसी का आरक्षण खतरे में आ गया है.

    मंडल आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक सूची में ओबीसी की संख्या 52 फीसदी है. तत्कालीन प्रधानमंत्री वी पी सिंह ने ओबीसी समुदाय को 27% आरक्षण देने का भी फैसला किया, फिर 2022 में होने वाले स्थानीय निकाय चुनावों में ओबीसी को राजनीतिक आरक्षण नहीं दिया गया. केंद्र सरकार ने ओबीसी को राजनीतिक आरक्षण से वंचित करने का काम किया है. 

    ज्ञापन के माध्यम से डी के अरीकर ने चेतावनी दी है कि जब तक स्थानीय निकायों में राजनीतिक आरक्षण नहीं दिया जाता है और ओबीसी की अलग से जनगणना नहीं की जाती है, तब तक कोई चुनाव नहीं होना चाहिए. वहीं जिला परिषद, नगर पंचायत, नगर परिषद, महानगरपालिका, विधानसभा और लोकसभा की तरह ही एसटी एससी के अनुसार जनसंख्या के अनुपात में आरक्षण दिए जाने की मांग आरीकर ने की है.