ST BUS
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    गोंदिया. महाराष्ट्र राज्य सड़क परिवहन निगम (एसटी) के कर्मचारियों की हड़ताल को लगभग एक माह पूरा होने आ रहा है. लेकिन सरकार व कर्मचारियों के बीच कोई समझौता नहीं होने के कारण हड़ताल खत्म होने के आसार नजर नहीं आ रहे हैं. इस बीच गोंदिया एसटी डिपो के और 6 कर्मचारियों के निलंबन के आदेश प्राप्त हुए है.

    जिसके बाद अब तक गोंदिया डिपो के कुल 17 कर्मचारियों को निलंबित किया गया है. इसके पूर्व ठेका पद्धति पर कार्यरत 19 कर्मचारियों के खिलाफ सेवा समाप्ति की कार्रवाई की गई है. इसके बावजूद कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर आक्रामक होकर जब तक मांगे पूरी नहीं होती तब तक काम पर लौटने के लिए तैयार नहीं हैं.

    इधर एसटी कर्मचारियों की हड़ताल के कारण दूरदराज ग्रामीण इलाकों से बसों में सफर करनेवाले यात्रियों व मानव विकास की बसों से स्कूल जानेवाले विद्यार्थियों को आवागमन को लेकर बडी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. वहीं दूसरी ओर हड़ताल का लाभ उठाकर कालीपीली टैक्सी व ऑटो चालक यात्रियों से मनमाना किराया वसूल कर रहे हैं. शाम 6 बजे के बाद तो मुसीबत में फंसे यात्रियों से मुंह मांगा दाम वसूला जा रहा है. जो सामान्य एसटी किराए से दुगुना नहीं तीगुना भी हो सकता है. ऐसे में विशेष रूप से परिवार सहित बाहर जाने वाले या आने वाले यात्रियों की स्थिति काफी दयनीय हो जाती है. उन्हें मुंह मांगा किराया देने के लिए मजबूर होना पड़ रहा हैं.

    25 किमी. का किराया 70 रुपए 

    कालीपीली टैक्सी व ऑटो चालकों द्वारा एसटी कर्मियों के हड़ताल को अवसर के तौर पर देखते हुए यात्री किराया दोगुना बढ़ा दिया गया है. पहले आमगांव से गोंदिया तक 25 किमी. के सफर के लिए प्रति यात्री 50 रु. किराया वसूला जाता था, जिसे बढ़ाकर प्रति यात्री 70 रु. किराया वसूला जा रहा है. यही स्थिति अन्य मार्गों पर चलने वाली निजी वाहनों की है.

    बस स्थानक प्रमुख सहषराम नैकाने के अनुसार एसटी की हड़ताल लंबे समय से चल रही है. इससे डिपो को भी अब तक करोड़ों रू. का नुकसान हो चुका है, लेकिन हड़ताल कब ख़त्म होगी यह कहा नहीं जा सकता. जल्द से जल्द हड़ताल खत्म होना कर्मचारी व यात्री सभी लिए लाभदायक है.

    वहीं यात्रियों का कहना है कि एसटी की हड़ताल के कारण स्थानीय जयस्तंभ चौक स्थित बस स्टैंड पर सवारी गाड़ियों के लिए दो-दो घंटे इंतजार करना पड़ता हैं. काली-पीली टैक्सी चालक मुंह मांगा किराया मांगते हैं. जिसे देने के लिए तैयार होने पर भी जब तक टैक्सी में ठुस-ठुसकर यात्री नहीं भर दिए जाते, तब तक टैक्सी आगे नहीं बढ़ती.