Picture of rural area Educational level dropped due to online education

    गोंदिया. कोरोना के कारण  लॉकडाउन किया गया था.  इसके बाद स्कूल-कॉलेजों में ऑनलाइन  कक्षाएं संचालित की गईं.  लेकिन कोरोना काल के बाद ग्रामीण क्षेत्रों में शालेय विद्यार्थियों की शैक्षणिक स्थिति गड़बडा गई. कक्षा 5वीं के लगभग 80 प्रश  छात्र दो अंकों की संख्या घटा नहीं सके और 65  प्रश छात्र भाग गणित को हल नहीं कर सके. प्रथम एजुकेशन फाउंडेशन ने देश भर में ‘एनुअल स्टेटस ऑफ एजुकेशन रिपोर्ट’ सर्वे किया. इसमें यह  चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है. 

    इसमें मूलभुत सुविधा की उपलब्धता भी घटी है. साथ ही यह भी सामने आया है कि पांचवीं के 44 प्रश व  आठवीं कक्षा के 24 प्रश  छात्रों को  कक्षा दूसरी के स्तर पर मराठी पढ़ना नहीं आया.  कोरोना काल से पहले 2018 में भी इस संबंध में एक सर्वे किया गया था. उसके अनुसार  छात्रों की संख्या में 8 से 10 प्रश की कमी आई है. फाउंडेशन द्वारा  पहले देश भर में स्कूली शिक्षा की स्थिति का सर्वेक्षण किया जाता है.  

    इसमें पहली से आठवीं कक्षा तक के छात्रों ने अपनी आयु के अनुसार भाषा और गणित में आवश्यक कौशल प्राप्त किया है क्या  है ?   इसका निरीक्षण किया गया.  हर साल होने वाला यह सर्वे  कोरोना काल में खंडित हुआ. इससे पूर्व शैक्षणिक वर्ष 2018-19 में सर्वे किया गया था और उसके  बाद वर्ष 2022-23 में  शैक्षणिक रिपोर्ट घोषित की गई.  जिसमें  यह बात सामने आई कि 

    कोरोना काल में छात्र स्कूल से दूर हुए, छात्रों की क्षमता विकास पर इसका असर पड़ा, वहीं शालाबाहय छात्रों का प्रमाण   कम हुआ,  6 से 14 वर्ष की आयु के बीच स्कूल न जाने वाले छात्रों का प्रमाण   एक प्रतिशत से भी कम है. जबकि 15 से 16 साल के यानी माध्यमिक कक्षा के करीब 1.5 प्रश छात्र शालाबाहय हुए. दूसरी कक्षा के छात्रों से अपेक्षा होती है कि  वे  साधारण  10 से 12 सरल वाक्यों का एक परिच्छेद पढ़ने में सक्षम हो. लेकिन 5वीं कक्षा के लगभग 44 प्रश व 8वीं कक्षा के 24 प्रश छात्र उस परिच्छेद को नहीं पढ़ सके. आठवीं कक्षा के 2.5 फीसदी छात्र अक्षर भी नहीं पहचान सकते. ऐसी ही चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है. 

    इसी प्रकार इस सर्वे में कक्षा 5वीं के छात्रों को दो अंकों की संख्या  यानी (41-31) घटाने को कहा गया इसमें केवल 19.6 प्रतिशत छात्र ही उसे   हल कर पाए.  इससे पहले 2018 में हुए सर्वे में ऐसे गणित को हल करने वाले छात्रों का प्रमाण  30.2 प्रश था. आठवीं कक्षा के केवल 34.6 प्रतिशत, जिन्हें तीन अंकों की संख्या को एक अंक की संख्या (519/4) से विभाजित करने के लिए कहा गया था, उसे  हल करने वाले छात्र केवल 34.6 प्रश थे. जबकि पिछले सर्वे में यह आंकडा 40.7 प्रश था.