Lord Ganesh
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    गोंदिया. पिछले वर्ष भी कोरोना संक्रमण के कारण हर कार्यक्रम सादगी से मनाए गए. कोरोना की दूसरी लहर भले ही समाप्ति की ओर हो लेकिन संभावित तीसरी लहर के खतरे के मद्देनजर राज्य के गृह मंत्रालय ने इस वर्ष भी गणेशोत्सव सादगी से मनाने के लिए दिशानिर्देश जारी किए हैं. गत वर्ष की तरह इस वर्ष भी गणेश स्थापना, विसर्जन सहित शोभायात्रा आयोजन पर पाबंदी होगी. गाइड लाइन में यह भी स्पष्ट किया गया है कि कोरोना स्थितियों के मद्देनजर समय समय पर लागू पाबंदियां कायम रहेंगी. इसमें गणेशोत्सव को लेकर कोई ढील नहीं दी जाएगी. 

    नए दिशा-निर्देश से मूर्तिकार फिर निराश

    नई गाइड लाइन ने मूर्तिकारों को फिर निराश किया है. उन्हें उम्मीद थी कि घटते कोरोना संक्रमण के कारण कम से कम मूर्तियों के आकार में छूट दी जाएगी. लेकिन ऐसा नहीं हुआ. गत वर्ष भी कोरोना के चलते गणेशोत्सव सादगी से मनाए जाने के कारण मूर्तियां बिकी नहीं. केवल छोटी मूर्तियों की बिक्री हुई. इस बार भी कोविड 19 के कड़े नियमों को ध्यान में रखते हुए सादगी से गणेशोत्सव मनाए जाने की सूचना है. जिससे अब मूर्तिकारों की समस्या जस की तस है. हर वर्ष केवल गणेशोत्सव और नवदुर्गोत्सव के भरोसे ही मूर्तिकार अपने पूरे परिवार का वार्षिक खर्च का प्रबंध करते हैं. लेकिन कोरोना के चलते उनकी आर्थिक हालत बिगड़ गई है.

    मंडलों में 4 व घरों में 2 फुट की मूर्ति

    इस वर्ष 10 सितंबर से आरंभ होने वाले इस पर्व पर गत वर्ष की तरह कोरोना का साया है. जिसके चलते सार्वजनिक गणेशोत्सव मंडलों में 4 फुट तक की और घरों में 2 फीट तक की ही मूर्तियों की स्थापना की अनुमति है. नई नियमावाली के अनुसार सार्वजनिक मंडलों को प्रशासन की अनुमति लेना अनिवार्य होगा. सार्वजनिक गणेशोत्सव मंडल के पंडालों में भीड़ न बढ़ाने की हिदायत दी गई है. इतना ही नहीं आरती, भजन, कीर्तन के समय भी भीड़ न करने के निर्देश दिए गए हैं.

    मंडलों की ओर से तैयारियां शुरू

    पूरे राज्य में गणेशोत्सव एकमात्र ऐसा पर्व है जो बालकों से लेकर युवकों और सभी तबके के लोगों को उत्साहित और हर्षित करता है. गणेशोत्सव को लेकर बच्चे साल भर योजना बनाते हैं. गणेश मंडलों की तैयारियां भी साल भर चलती हैं. झांकियों से लेकर प्रतिमा तक सभी का नियोजन किया जाता है. मूर्तिकारों को पहले से ही आर्डर दिया जाता है. मूर्तिकार प्रतिमाए बनाने में जुट जाते हैं. कोरोना महामारी के पूर्व गणेश प्रतिमा केा लेकर कुछ भी नियम नहीं थे. सार्वजनिक गणेश मंडल 5 फुट से लेकर 15 फुट तक विशाल प्रतिमाए स्थापित करते थे.