…और पोल आ गया बीच सड़क पर, कई जगहों पर बन रहे परेशानी का सबब

    नागपुर. सिटी में अधिकतर उन सड़कों पर बिजली के पोल बीच में आते जा रहे हैं जहां सड़कों का चौड़ाईकरण और सीमेंटीकरण किया जा रहा है. पहले ये पोल सड़कों के किनारे होते थे लेकिन अब ऑटोमेटिक ही बीच सड़क पर आते जा रहे हैं. मतलब सड़कों का तो कल्याण किया जा रहा है मगर इसके साथ इन बिजली के खंभों को किनारे करने के कार्य में घोर उदासीनता बरती जा रही है. इसे विभागों के बीच समन्वय या फिर विकास कार्य का पूर्ण नियोजन का अभाव कहा जा सकता है.

    होना तो यह चाहिए कि सारे कार्य साथ-साथ हों तो नागरिकों को सुविधाओं का सहज लाभ भी हो. उलटे यह हो रहा है कि सड़कों को चौड़ाईकरण से जो बिजली के पोल बीच में आ रहे हैं वे वाहन चालकों के लिए जान का खतरा बन रहे हैं. झिंगाबाई टाकली से बोखारा की ओर जाने वाले रोड का सीमेंटीकरण व चौड़ाईकरण का कार्य हुए लगभग 1 वर्ष हो रहा है. इस रोड पर दोनों साइड के बिजली के पोल लगभग बीच सड़क पर ही आ गए हैं. 

    दूकानदारों के आ रहे काम

    बीच सड़क पर आ गए बिजली के ये पोल दूकानदारों को बोर्ड लगाने के काम आ रहे हैं. एक तो बीच सड़क पर पोल और उस पर विज्ञापन के बोर्ड वाहन चालकों का ध्यान भटकाते हैं और दुर्घटना का कारण बन सकते हैं. कुछ पोल के समीप तो केवल एक कार के पासिंग की ही जगह बची हुई है. रात के समय अगर किसी ने अचानक इस जगह पर ओवरटेक करने की गलती की तो सीधे पोल से ही टकरा जाएगा. ऐसा नजारा सिटी में केवल इस रोड पर ही नहीं है बल्कि अनेक सड़कें हैं जहां चौड़ाईकरण के चलते बिजली के पोल बीचोबीच आ खड़े हुए हैं. 

    उमरेड रोड पर वर्षों से अड़े 

    दक्षिण नागपुर में सक्करदरा ओवरब्रिज की बगल में उमरेड की दिशा से आने वाली साइड पर तो बिजली के खंभे रोड के बीचोबीच वर्षों से अड़े हुए हैं. इन्हें हटाने की जरूरत भी संबंधित विभाग नहीं समझ रहा है. यहां तो वाहनों के टकराने से 1-2 पोल टेढ़े भी हो चुके हैं. पोल की आड़ में फुटपाथ वाली साइड में अतिक्रमणकारियों को चौड़ी जगह मिल जाती है. वे कब्जा बनाए बैठे हैं. मनपा तो यहां कचरा तक डंप करती है. सिटी का जोरों से विकास चल रहा है लेकिन ये छोटी-छोटी समस्या भी अब खतरनाक होती जा रही है. संबंधित अधिकारियों के साथ ही जनप्रतिनिधियों को इसे गंभीरता से लेने की जरूरत है.